एक ट्रैक्टर बालू की कीमत आप क्या जानो नीतीश बाबू

बिहार राज्य बालू की अवैध निकासी और इसके अवैध कारोबार पर रोक लगाने में जुटी है. इस कोशिश में कारोबार पर कितनी चोट हुई यह तो पता नहीं, मगर आम आदमी जो घर बनाने का सपना पूरा करना चाह रहा है, वह बालूबंदी का कहर झेल रहा है. ऐसे ही एक व्यक्ति रंजीत कुमार राहुल ने फेसबुक पर अपनी व्यथा को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नाम चिट्ठी के रूप में पेश किया है. इनकी चिट्ठी पढ़िये, और समझिये कि जमीनी हालात कैसे हैं.

मै रंजीत कुमार राहुल नासरीगंज दीघा पटना का निवासी हूं. अभी तक सरकार से कम ही काम पड़ा है, प्राइवेट स्कूल से पढ़कर प्राइवेट नौकरी करता हूं और निम्न मध्यवर्गीय आकांक्षा एवं अपेक्षा के साथ आपके ही राजधानी में किराये के मकान में रहता हूं. लिहाजा  अब तक सरकार को अपने लिये संविधान की ही तरह मेरा, मेरे द्वारा मेरे लिये समझने की गलती करता रहा हूं.

रंजीत कुमार राहुल

साहेब, मैं तो अपने दुनिया में  मस्त था. वो तो सगे  सम्बन्धियों  ने अपने घर  का ऐसा सपना दिखाया कि दोनों भाइयों ने मिलकर उच्च ब्याज दर पर कर्ज थोड़ी सी जमीन खरीदी, जितनी जमीन में आपकी कारकेड तो छोड़िये,  आपकी अकेले की गाड़ी ही पार्क हो सकती है. धीरे-धीरे पेट काटकर कर्ज चुकाकर घर बनाना शुरू किया. ध्यान रहे, इनकम टैक्स भरता हूं तो कुल सालाना आमद-खर्च का कागज़ ऐसा है कि एक संस्था ने घर बनाने के लिए किस्तों में लोन देना शुरू किया है. इतने में  आपने कुर्सी से उठकर फिर बैठकर पूरा कुनबा बदल लिया और सुधार के नाम पर असली संकट अब शुरू हुआ है.

सभी संस्था, डिपार्टमेंट को शायद  सही मानते हुए और अगले नियम को चुस्त-दुरुस्त किये बगैर आपकी सरकार ने पहले नियम को बंद कर दिया. जी, बालू वाले मामले की बात कर रहा हूं. फिर माननीय न्यायलय को हस्तक्षेप करना पड़ा. सब मिलाकर ऐसा सुधार शुरू हुआ कि क्या कहें…. कथित बालू, स्टोन  माफिया के नेक्सस का कुछ हुआ भी या नहीं यह तो पता नहीं, लेकिन इस  बालू के अभाव में हम जैसों का काम बंद  हो गया. मासिक क़िस्त चालू है, साथ ही घर का किराया भी दे ही रहा हूं.

रोज पेपर पर बगुले की तरह वकोध्यान लगाते हुए पता चला कि अब ऑनलाइन बालू मिलेगा. तुरंत ऑनलाइन जा कर मंत्रीजी के फोटो के नीचे क्लिक करके  100cft बुक कर दिया. तारीख 30 नवम्बर 2017  समय 1.31 पीएम. यकीन मानिये कन्फर्मेशन का 5 sms आया, सब सेव है. फिर हमारा पूरा परिवार गृहप्रवेश की तैयारी में मानसिक रूप से व्यस्त हो गया. लेकिन हाय  रे आम आदमी की किस्मत, भोट ख़तम हो जाने के बाद वाला फीलिंग आया. पूरे 20 दिन इंतज़ार करने के बाद श्रीमान परशुराम सिंह के मोबाइल पर जो पेपर में शायद  गलती से छपा था- 9471007395  पर सुबह से शाम तक एकसूत्री कार्यक्रम चला कर संपर्क किया तो पता चला की 100 cft जो ट्रैक्टर से जाना था वो gps वाला गाडी  उपलब्ध नहीं होने के  कारण नहीं जायेगा.

श्रीमान  gps की बात करते हैं! चेक करवा लीजिये 90% ट्रैक्टर में अगर स्पीडोमीटर और मैलेमीटर मिल जाये तो कहियेगा, सिंह जी ने कहा  की 250 cft से ऊपर बुक करवा दिया जाये तो बालू चला जायेगा, डूबते को तिनके का सहारा  साहब तुरंत 400 cft बुक किया. तारीख 19 दिसंबर 2017 शाम 4.46 pm  और आर्डर no  सिंह जी को ऊपर के नंबर पर sms  कर दिया. फिर  निश्चिंत हो कर तापमान के उतार-चढ़ाव में कपड़ा बदलते रहे…. आप भी यात्रा पर थे और क्या तो मिथिलांचल के विकास की बात कर रहे थे, कहीं पेपर में पढ़ा. ..साहेब, मै भी मिथिलांचल वाला ही हूं, जो गांव में बीघा को छोड़कर मगह में  कट्ठा वाला होने को ही विकास समझ बैठा हूं.

असली खेल अब शुरू हुआ 3 नंबर से एक ही आदमी- प्रतिष्ठान का फ़ोन आता है. सभी नंबर  और बातचीत सेव है, कभी बालू की क्वालिटी पर  मन में संशय डाला जा रहा है, तो कभी सरकारी भाड़ा  20 रुपया प्रति किलोमीटर में असहमति के साथ  बारगेन किया जा रहा है.

मेरा घर तो क़िस्त चालू होने के बाबजूद रुका ही हुआ है,   कल-परसों मुझे बालू मिले, जिसके लिए आप या आपका सिस्टम  तेज़ तर्रार अफसर कोई भी धन्यवाद  का पात्र कतई  नहीं है.

आपके राज्य का नहीं आपके राज का नागरिक- रंजीत

जिसका आर्डर no-OD 20171130133023613 -अभी तक आशा में.

और  आर्डर no -OD 20171219164710373 -अभी तक आशा में है,

सधन्यबाद

रंजीत कुमार राहुल

नासरीगंज, दीघा, पटना

Spread the love
  • 122
    Shares

Related posts