जब पूर्णिया की गुड़िया ने संसद भवन में किशोरियों के लिए आवाज उठायी

बासु मित्र किशोरियों का मसला बिल्कुल अलग है. वे न बच्ची होती हैं, जिन्हें बहुत अधिक संरक्षण की जरूरत होती हैं. न ही वे युवा होती हैं, जिन्हें सबकुछ करने का संवैधानिक अधिकार मिला होता है. मगर नीतिगत कमियों की वजह से वे इन दोनों पाटों के बीच पिसती रहती हैं. मगर इस साल वैश्विक बाल दिवस(20 नवंबर) का दिन भारत भर की किशोरियों के लिए खास रहा. क्योंकि इस मौके पर संसद में जिन आठ बच्चों को सांसदों को संबोधित करने का मौका मिला, उनमें पूर्णिया की किशोरी गुड़िया…

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