‘नई वाली हिंदी’ इस बार भी नहीं आयेगी पटना

कल से पटना के ज्ञान भवन में पटना पुस्तक मेला की शुरुआत हो रही है. इस मेले को लेकर कई तरह की खबरें कही जा रही है. एक तरफ पहली बार बिहार सरकार इस मेले में साझीदार बना है. फिर अगले साल से इंटरनेशनल होने की भी बात है. तो दूसरी तरफ मेले का धूप से सरकारी ज्ञान भवन की छांव में चला जाना आम पाठकों को अखर रहा है और स्टॉल कम होने की भी बातें हैं. मगर पटना के साहित्य पाठकों के लिए इस बार भी वही निराश…

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पटना पुस्तक मेला-‘ज्ञान’ को ‘भवन’ में नजरबंद करने की तैयारी

शशांक मुकुट शेखर खुला आसमान स्वछंदता का प्रतीक है और बंद दरवाजे बेशक गुलामी को दर्शाते हैं. और जब बात महिला सशक्तिकरण की करें तो आजादी के प्रतीकों का इस्तेमाल करना बेहद आवश्यक होता है. आगामी 2 दिसंबर से पटना में पुस्तक मेले का आयोजन किया जा रहा है. थीम रखा गया है ‘नारी सशक्तीकरण.’ पुस्तक मेले के सभी आयोजन में महिलाओं की भरपूर भागीदारी होने वाली है. पर महिलाओं के सशक्तिकरण पर आधारित पुस्तक मेले का गाँधी मैदान के खुले परिसर से ज्ञान भवन के बंद कमरों में शिफ्ट…

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इंटरनेशनल होने की डगर पर पटना पुस्तक मेला, इस बार महिलाओं का रहेगा राज

सत्यम कुमार झा इस बार का पुस्तक मेला एक अभ्यास है, व्यवस्थापक तैयारी कर रहे हैं, क्योंकि 25 वां पुस्तक मेला जो अगले साल लगेगा अन्तराष्ट्रीय होने वाला है. मुझे वैसे ही याद है कि इसी साल फरवरी में हुए पुस्तक मेला में माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आश्वासन दिया था कि अब पटना में अंतराष्ट्रीय पुस्तक मेला लगेगा. इसके लक्षण दिखने लगे है. इस बार खुद बिहार सरकार पुस्तक मेला में सहभागिता निभा रही है. संभवतः इसी वजह से इस बार का पुस्तक मेला गांधी मैदान से हटकर ज्ञान…

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