इसे पढ़कर कहीं आप प्यार न करने लगें ओल्डएज होम से

पिछले दिनों टीएन शेषण के ओल्डएज होम में पाये जाने पर एक बहस शुरू हुई थी. ज्यादातर लोगों ने इस खबर पर शेषण के लिए अफसोस जताया था. मगर कुछ लोग ऐसे भी थे, जिन्होंने दमदार तरीके से अपनी बात रखी थी कि आज के जमाने में ओल्डएज होम बुजुर्गों के लिए जरूरत बन गयी है और कई दफा वे घरों से बेहतर आनंद ओल्डएज होम में पाते हैं. इसी मसले पर अमेरिका के कैलिफोर्निया शहर में रहने वाली चिकित्सक डॉ. अर्चना पांडे ने बिहार कवरेज के लिए यह आलेख…

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अच्छा ही तो है कि शेषन ओल्ड एज होम में अपनी उम्र वालों के साथ ताश खेल रहे होंगे

बुढ़ापा ओल्ड एज होम में गुजारना पड़ा. अपने समाज में इसे आज तक दुखदायक स्थिति मानी जाती है. मगर जो हालात हैं उसमें किसी अनचाही स्थिति में बेटे-बहुओं के घर में पड़े रहने से बेहतर है ओल्ड एज होम में आजाद जिंदगी जीना और मजे करना. शेषन के ओल्ड एज होम में पाये जाने पर जो भावुक माहौल बना है, उसके बारे में एक नयी निगाह है, वास्तिवकता की धरातल पर लाते हुए, दुनिया भर के ओल्ड एज होम के अनुभव और अपने देश की तल्ख सच्चाई अपने ही अंदाज…

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