मैं किशनगंज हूं, सोने की चिड़िया के सुर्खाब परों के जैसा

फिरोज किशनगंज के रहने वाले हैं, जेएनयू से स्पेनिश की पढ़ाई की है और अभी चेन्नई शहर में एक निजी शहर में कार्यरत हैं. उनके दिल में किशनगंज बसता है. वे हमेशा अपने शहर, अपने इलाके को याद करते हैं. पढ़िये, उन्होंने इस पोस्ट में किशनगंज को किस शिद्दत से याद किया है. फिरोज आलम मैं किशनगंज हूँ. सीमांचल की गोद मे बैठा एक अनाथ, एक अछूत हूँ, एक कमज़ोर व बीमार पहचान हूं, इसलिए साल के पहले दिन भी खामोश हूँ. अब तो बस बिस्तर पर पड़े किसी रोगी…

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