इस बिहारी राजनेता ने दी थी नेताजी के साइबेरिया में कैद होने की कांस्पिरेसी को हवा

नोट- इस आलेख का मकसद कहीं से इस बहस में नहीं पड़ना है कि 1945 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु हुई थी या नहीं. क्योंकि उनकी जांच के लिए गठित तीन आयोगों में से दो मान चुकी है कि नेताजी की मौत विमान हादसे में हुई थी और सरकार भी इस बात को स्वीकार कर चुकी है. हम उस राजनेता की भूली-बिसरी कहानी सामने लाना चाहते हैं, जिसने नेताजी के जिंदा होने के दावे के पक्ष में सबसे सनसनीखेज तथ्य पेश किये थे. पुष्यमित्र यह कहानी दरभंगा के…

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