ट्रेन जैसी बोगियों में रहते बच्चे और असुरक्षित नौकरी के बीच पिसते शिक्षक, यही है बिहार के ‘नेतरहाट’ की कहानी

पुष्यमित्र जमुई गया तो सिमुलतला आवासीय विद्यालय को देखने के मोह से खुद को बचा नहीं सका. इन दिनों जब बिहार में मैट्रिक और इंटरमीडियेटड के रिजल्ट आते हैं तो टॉप टेन में ज्यादातर यहीं के बच्चे होते हैं. मैं देखना चाहता था कि आखिर वह कैसा विद्यालय है, जहां एक साथ इतने मेधावी बच्चे पढ़ते हैं. जमुई स्टेशन पर साढ़े तीन घंटे के इंतजार और ईएमयू ट्रेन पर सवार होकर करीब डेढ़ घंटे की यात्रा के बाद जब उस स्कूल तक पहुंचा तो पहली बात यही मन में आयी…

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सरकारें यही चाहती है की कॉलेज में क्लासेज बंद रहे

आदित्य मोहन झा सरकारें यही चाहती है की कॉलेज में क्लासेज बंद रहे, आपके बच्चे गेस पेपर पढ़के परीक्षा दें और प्रोफेसर पैरवी देख के नम्बर. डिग्री लेने के बाद कुछ दिन आरएस अग्रवाल, प्रतियोगिता दर्पण रगड़ के बैंक-एसएससी-रेलवे की तैयारी हो और फिर हार के आपके बच्चे बिहार संपर्क क्रांति के स्लीपर बोगी में फाइन देके दिल्ली निकल जाए नौकरी करने. वो चाहते ही नहीं कि विश्वविद्यालय में पढ़ाई हो और लोग पढ़ लिख के योग्य बनें, नहीं तो उनकी भ्रष्ट, जाति-धर्म और नकारापन से भरी राजनीति पे सवाल…

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केंद्र सरकार ने दबा लिया बिहार के बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के 12541.83 करोड़ रुपये

उज्ज्वल कुमार केंद्र सरकार का बिहार से हकमारी का नया खुलासा सामने आया है. वर्ष 2014 से नरेन्द्र मोदी सरकार सत्ता में आते ही ‘सर्व शिक्षा अभियान’ का बिहार के हिस्से में लगातर कटौती की है वर्ष 2014-15 से वर्ष 2017-18 तक केंद्र सरकार ने अपने फंड अंश दान से 12541.83 करोड़ रुपये की कटौती की है. बिहार सरकार ने वर्ष 2013-14 से 2017-18 तक ‘सर्व शिक्षा अभियान’ के लिए 42568.41 करोड़ का बजट अप्रूव किया, जिसमे केंद्र सरकर को 25043.51 करोड़ रुपया देना था. लेकिन केंद्र सरकार ने मात्र…

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खिजरसराय के गांवों में मुम्बइया पूजा ने न जाने कितने फूल खिला रखे हैं

निराला जी पिछले दिनों खिजरसराय के कुछ गांवों की यात्रा पर थे. वहां उनकी मुलाकात एक मुम्बइया लड़की पूजा से हुई जो मध्य बिहार के इस ठेठ देहात में स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में सकारात्मक बदलाव लाने में जुटी थी. उनके मन में सहज सवाल था कि एक महानगर की यह लड़की बिहार के गांवों में कैसे रह रही है और कैसे उसने यह सब मुमकिन किया. इन्हीं बातों का जवाब इस रिपोर्ताज में है. निराला बिदेसिया पूजा से पहले कभी आमने-सामने की कोई बात-मुलाकात नहीं थी. सिर्फ एक दफा…

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बिहार में ‘बेहतर शिक्षा’ का मतलब नीतीश जी की योजनाओं का ‘प्रचार’ है!

प्रथम जैसी दूसरी एजेंसियों की तर्ज पर अब बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने शिक्षा के मसले पर जिलों की रैंकिंग कराने की शुरुआत की है. कल उस रैंकिंग की रिपोर्ट भी जारी हुई है. दिलचस्प है कि शिक्षा की इस रैंकिंग में पढ़ाई-लिखाई का मसला सिर्फ 20 फीसदी है, शेष 80 फीसदी नंबर नशा मुक्ति, बाल विवाह आदि के प्रचार, मिड-डे मील, आधार कार्ड, अकाउंट खुलवाने जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों के लिए है. मतलब साफ है, बिहार में सरकारी स्कूल का मतलब है बिहार सरकार की योजनाओं को लागू करवाना.…

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