यह कैसा न्याय है? लालू तो ‘ललुआ’ हो जाते हैं, जगन्नाथ ‘बाबू’ ही रह जाते हैं

सवाल सिर्फ सीबीआई की जांच और अदालती प्रक्रियाओं का नहीं है, मीडिया और बौद्धिक समाज का भी है. जिसके लिए घोटाला का आरोप लगते ही लालू ‘ललुआ’ हो जाता है. जबकि देश में सैकड़ों नेता भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद सम्मानित तरीके से पुकारे जाते रहे हैं. राजनीतिक अध्येता जयंत जिज्ञासू मानते हैं कि इसके पीछे मीडिया और सवर्ण समाज का अपना पूर्वाग्रह है. चारा घोटाला तो एक बहाना था, जिसकी सूली पर लालू को लटका कर सामाजिक न्याय की प्रक्रिया को रोकने और लालू की वजह से उठे बिहार…

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