लाशों का कोई धर्म नहीं होता प्रधानमंत्री जी, इस देश को तालिबान बनने से बचा लीजिये

उपासना झा हिंदी के नई पीढ़ी की चुनिंदा संवेदनशील कवियों में से एक हैं. वे उन लोगों में से हैं, जो विचारधाराओं के पूर्वाग्रह के मुक्त होकर अपनी बात रखती हैं. मगर कल की राजसमंद की घटना ने उन्हें इस कदर उद्वेलित कर दिया है कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक खुली चिट्ठी लिख दी है. इस पत्र को सरकारी दल और उसके समर्थकों को जरूर पढ़ना चाहिए. क्योंकि यह उन लोगों की आवाज है, जो पिछली सरकार के ऊबी हुई थी और नये निजाम से बदलाव की…

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