इस ‘मचान’ ने एक झटके में बदल दी मैथिली की किताबों की दुनिया

पुष्यमित्र इन दिनों नई दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय पुस्तकमेला में जहां बड़े-बड़े प्रकाशन अपने स्टॉल पर लोगों को जुटाने के लिए तरह-तरह के आजमाइशों का सहारा ले रहे हैं. लेखक अपने किताबों का प्रचार करने में जुटे हैं, कुछ संस्थानों ने तो कौड़ियों के दाम अपनी किताबों को बेचने के लिए फेरी वालों तक को हायर कर लिया है. एक छोटे से बुक स्टॉल पर अनायास ही भीड़ उमड़ रही है. इतनी भीड़ के पास-पड़ोस के बुक स्टॉल वाले बार-बार परेशान होकर इसकी शिकायत कर आते हैं. स्टॉल वाले को चेतावनी…

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मैथिली का अभिनव प्रयोग – पद्मश्री की कथाओं पर पद्मश्री के रंग

बिहार कवरेज मैथिली की दुनिया में यह अभिनव प्रयोग होने जा रहा है. रामायण, महाभारत, पुराण और बोधिसत्व की कथाओं पर चित्रावलियां हमने आपने खूब देखी हैं. मगर किसी आधुनिक साहित्यिक कृति पर चित्रावलियां बनने की यह संभवतः पहली घटना है. अब यह खबर कंफर्म है, मैथिली की कथाकार पद्मश्री उषाकिऱण खान की दो कृतियों पर मिथिला पेंटिग की चित्रावलियां तैयार हो रही हैं और यह काम करने का बीड़ा चित्रकार पद्मश्री बौआ देवी और सहयोगी चित्रकारों ने उठाया है. नई दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला में सात जनवरी को…

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मैथिली का मचान दिल्ली में ही क्यों बनता है, पटना में क्यों नहीं?

खबर आ रही है कि दिल्ली के अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेला में मैथिली पुस्तकों, लेखकों और कलाचारों के जुटान के लिए ‘मैथिली मचान’ के नाम से एक स्टॉल बुक कराया गया है. इस खबर ने सहज ही पटना के मैथिली भाषियों के मन में इस कचोट को पैदा कर दिया कि यह मचान पटना पुस्तक मेला में क्यों नहीं बना. पटना जो बिहार की राजधानी है, वहां लगातार मैथिली का सम्मान घटता जा रहा है, जबकि देश की राजधानी दिल्ली में पिछले दिनों लगातार मैथिली मजबूत हुई है. इस सवाल को…

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