स्कूलों में पहले किताबें पहुंचाइये सीएम साहब, समाज सुधार का संदेश थोड़ी देर में भी पहुंचेगा तो चलेगा

डियर नितीश कुमार जी शराबबंदी या फिर यूं कहें कि पूर्ण शराबबंदी के समर्थन में मैं भी हूं. सिर्फ पूर्ण शराबबंदी ही नहीं अपितु मैं तो पूर्ण नशामुक्ति का भी पक्षधर हूं. आपने बिहार में पूर्ण शराबबंदी करके एक नेक कार्य किया है जो निश्चित रूप से सराहनीय है. इससे न जाने कितने परिवार में फिर से खुशियां लौटी हैं. आपको उन सब की दुआएं मिल रही हैं. अधिक सम्भव है कि वो चुनाव के दौरान अथवा उसके परिणाम आने पर आपको दिखे भी. इन दिनों आप समीक्षा यात्रा पर…

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लोकतंत्र में कातर जनता की असली जगह कतार ही है #मानवश्रृंखला

पिछले साल जब शराबबंदी के खिलाफ मानव श्रृंखला का पहला आयोजन हुआ था तो यह फेसबुक पोस्ट लिखी थी. आज एक मित्र ने इस पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा है कि इस आलेख में शराबबंदी के साथ दहेज प्रथा और बाल विवाह का विरोध भी जोड़ दें तो यह आलेख आज के लिए भी फिट है. बस इस बार के आंकड़े थोड़े अलग होंगे… पुष्यमित्र लोकतांत्रिक शासकों के ऊपर भी कभी-कभार मध्यकालीन सत्ताधीशों वाली सनक सवार हो जाती है. वे भी जमीनी काम छोड़ कर भांति-भांति के करतबों को…

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दबाव नहीं है, तो मानव श्रृंखला का क्यों विरोध कर रहे हैं शिक्षक

हाई कोर्ट में बिहार सरकार ने कहा है कि किसी पर मानव श्रृंखला में शामिल होने का दबाव नहीं है, मगर जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है. कई जगह शिक्षा विभाग के अधिकारियों और शिक्षकों के बीच तू-तू, मैं-मैं की नौबत आ रही है. अब नीचे अररिया और किशनगंज के दो वीडियोज को देखिये. पहले वीडियो में एक शिक्षक पूरे तर्क के साथ मानव श्रृंखला में शामिल नहीं होने की बात कर रहा है. दूसरे वीडियो में किशनगंज में शिक्षक विद्रोह करने औऱ सरकार को चुनौती देने पर उतारू नजर आ…

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कड़ाके की ठंड में छोटे बच्चों को सड़कों पर खड़ा करने की सरकारी जिद

P.M. यह तसवीर पिछले साल की मानव श्रृंखला की है. जब अररिया में स्कूली बच्चों को उफनती नदी के नीचे चचरी के पुल पर खड़ा कर दिया गया था, ताकि बिहार के मुख्यमंत्री की जिद पूरी हो सके. इस साल भी एक सनकी राजा की जिद पूरी करने के लिए प्रशासन जमीन-आसमान एक कर रहा है. एक समय बाद हर समझदार आदमी सनकी हो जाता है और सनक में उस व्यक्ति को यह भी समझ नहीं आता कि वह जो कर रहा है वह मजह उसकी जिद है. पिछले एक…

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