जानिये उस आचार्य को जिसने नचनिया-बजनिया ‘भिखारी’ को सबसे पहले लोकनायक कहा

आज भिखारी ठाकुर की जयंती है. इस बार की जयंती खास वर्ष में है. भिखारी ठाकुर के नाच के सौ साल पूरे हुए हैं. उनकी रंगयात्रा का शताब्दी वर्ष है. अब भिखारी को रंगकर्म, गीतकारी, महान रचनाकार, समाजसुधारक, अपने समय के सवालों से मुठभेड़ करनेवाले नायक के रूप में रखकर आकलन किया जा रहा है. लेकिन जब वे थे, तब ऐसी स्थिति नहीं थी. तब ऐसे कर्म करनेवाले को महज नचनिया-बजनिया-लौंडा ही कहा जाता था. उस समय सबसे पहले एक व्यक्ति खड़ा हुआ था जो हिंदी साहित्य की दुनिया में…

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