पढ़िये, सच्चिदानंद सिंह की कहानी ‘पकड़वा’

इस पुस्तक मेले में साहित्यिक रचनाओं से जुड़ी कई किताबें आयीं, इनमें से ब्रह्मभोज सबसे अलग इसलिए है, क्योंकि इसकी कहानियों में पुराना क्लासिकल अंदाज तो है ही, नये जमाने की नयी सोच भी शामिल है. भूले-बिसरे दिनों की छौंक के बीच से कुछ ऐसे किस्सों को निकाल कर लेखक सच्चिदानंद सिंह लाते हैं, जो आज भी आपको उतना ही आकर्षित करती है. आज छुट्टी के दिन आप आराम से पढ़िये उनकी इस संग्रह की एक कथा पकड़वा… सच्चिदानंद सिंह भागलपुर विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के रहने के लिए छात्रावास तो…

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बिहार का भागलपुर और झारखंड का पलामू अंचल गूंजता है ब्रह्मभोज की कहानियों में

डॉ शोभना जोशी संग्रह में कुल सत्रह कहानियाँ हैं. ये कहानियां भिन्न-भिन्न काल की हैं, जो इकट्ठा होकर समकालीन विसंगतियों का शाब्दिक कोलाज रचती हैं. ‘‘मेट’’,‘‘चाइभी’’, ‘‘पुरुष’’  कहानी को छोड़ अन्य कहानियों के सूत्र और भाषिक संरचना पर बिहार क्षेत्र का प्रभाव है, पर ‘‘पकड़वा’’ पूरी तरह बिहार की कथा है. बाकी सभी कहानियाँ हिन्दुस्तान में कहीं भी घटित हो सकती हैं, घट भी रही हैं और लगता है घटती रहेंगी भी. ये कहानियाँ स्मृतियां है, अनुभव हैं, सामाजिक यथार्थ हैं पर बगैर-शोर मचाये समाज के प्रति प्रतिबद्ध हैं. ये…

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