कल से शुरू हो रहे शुकराना समारोह के लिए कितना तैयार है पटना?

इस साल की शुरुआत में गुरु गोबिंद सिंह के 350वें प्रकाशोत्सव के भव्य आयोजन की वजह से भरपूर तारीफ बटोरने वाली बिहार सरकार ने तय किया था कि साल के अंत में वह ‘शुकराना समारोह’ भी मनायेगी. यह आयोजन भी उतना ही भव्य होगा. यह समारोह कल से शुरू हो रहा है, मगर इस समारोह की तैयारियां क्या उतनी ही पुख्ता है, इन सवालों का जवाब रविशंकर उपाध्याय की इस खबर में तलाश सकते हैं, जो प्रभात खबर में छपी है. उनके ब्लॉग जलशहर से साभार… रविशंकर उपाध्याय शुकराना समारोह…

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बिहार में ‘बेहतर शिक्षा’ का मतलब नीतीश जी की योजनाओं का ‘प्रचार’ है!

प्रथम जैसी दूसरी एजेंसियों की तर्ज पर अब बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने शिक्षा के मसले पर जिलों की रैंकिंग कराने की शुरुआत की है. कल उस रैंकिंग की रिपोर्ट भी जारी हुई है. दिलचस्प है कि शिक्षा की इस रैंकिंग में पढ़ाई-लिखाई का मसला सिर्फ 20 फीसदी है, शेष 80 फीसदी नंबर नशा मुक्ति, बाल विवाह आदि के प्रचार, मिड-डे मील, आधार कार्ड, अकाउंट खुलवाने जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों के लिए है. मतलब साफ है, बिहार में सरकारी स्कूल का मतलब है बिहार सरकार की योजनाओं को लागू करवाना.…

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बाल विवाह रोकने के लिए किशोरियों ने बिहार सरकार को दिये कमाल के टिप्स

पिछले दिनों राजधानी पटना में बिहार के अलग-अलग जिलों की सौ किशोरियां जुटी थीं. दो दिन के कार्यक्रम के दौरान उन्हें कई जानकारियां हासिल कीं, अपने मसलों पर चर्चाएं कीं, मौज-मस्ती कीं और जाते-जाते बिहार सरकार को कई सुझाव देकर गयीं. ये सुझाव उन्होंने राज्य के शिक्षा मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, समाज कल्याण मंत्री और पंचायत मंत्री को सौंपे हैं. ये ऐसे सुझाव हैं कि अगर सरकार इन पर अमल करे तो बाल-विवाह की समस्या से आसानी से निजात पाया जा सकता है. इनमें कुछ ऐसे सुझाव भी हैं जो किशोरियों…

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बेटी पढ़ गयी तो दहेज बढ़ जायेगा, तो करा दो जल्दी शादी

तपस्या चौबे बिहार के चंपारण में बचपन गुजारने वाली तपस्या इन दिनों अमेरिका के न्यू जर्सी में रहती हैं और सोशल मीडिया पर बिहार के जीवन को संजीदगी से याद करती हैं. अविनाश द्वारा बाल विवाह पर लिखे गये आलेख के बाद इन्होंने यह पोस्ट लिख कर अपने इलाके में समाज और परिवार की मानसिक स्थिति को अच्छी तरह जाहिर किया है. बिहार में बाल विवाह और दहेज के ख़िलाफ़ आंदोलन चलाए जा रहें हैं. मुझे इसके बारे में ठीक से जानकारी नही कि आंदोलन किस स्तर पर चल रहा…

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आपको खबर भी है कि बचा है या एक्सपायर हो गया ‘मधुबनी पेंटिंग’ का जीआई टैग?

पुष्यमित्र पिछले दिनों जहां रसगुल्ले का जीआई टैग हासिल करने के लिए बंगाल और ओड़िशा जैसे राज्यों के बीच अच्छी खासी जंग चली थी. देश के दूसरे राज्य जीआई टैग के लिए जान लड़ा रहे हैं. मगर बिहार राज्य की हालत यह है कि यहां मधुबनी पेंटिंग को मिला-मिलाया टैग दो साल पहले एक्सपायर हो चुका है और रिन्युअल कराने की बात तो दूर उद्योग निदेशालय के अधिकारियों को इस बारे में खबर भी नहीं हैं. बिहार की जिन पांच वस्तुओं को जीआई टैग मिला है, उनमें से तीन भारत…

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