बच्चा घर में हो तो खुशियां आसपास रहती हैं, उदासी दरवाजे से लौट जाती है

मिथिलेश कुमार राय एक बच्चा हो घर में तो घर के शेष सारे सदस्य उस बच्चे के पहरेदार के किरदार के निर्वाह में लग जाते हैं. बच्चे का क्या पता कि वह कब क्या करने लगे. जरा सी नज़रें हटी नहीं कि ये देखो क्या कर दिया–ड्रेसिंग टेबल के सारे सामानों को पलट दिया! बच्चे का जब तलक नटखटपन गुम न हो जाए, घर के लोगों को उसके सेवक की भूमिका में रहते हुए जी हजुरी में तत्पर रहना पड़ता है. घर में कोई नन्हां बच्चा हो तो वातावरण से…

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