बसंत सबका है, खुसरो ने औलिया को पीले फूल देकर ही शोक से उबारा था

उपासना झा प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु। [ हे परम चेतना, सरस्वती के रूप में आप हमारी बुद्धि, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका हैं. हममें जो आचार और मेधा है उसका आधार आप ही हैं. आपकी समृद्धि और स्वरूप का वैभव अद्भुत है.] ऋग्वेद में देवी की स्तुति इस प्रकार की गई है. माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को विद्या की अधिष्ठात्री देवी की पूजा की जाती है. तिथि के अनुसार आज ही हिंदी के सबसे बड़े कवि महाप्राण का जन्मदिन भी है. ‘मैं ही बसंत का अग्रदूत’…

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