यहां वनभोज के लिए जमा किये जा रहे हैं दस-दस के नोट

सांकेतिक तसवीर मिथिलेश कुमार राय पहली जनवरी अब बिलकुल पास आ गयी है तो लोग इसके बारे में तरह-तरह की योजना बनाने में दिमाग के घोड़े दौड़ाने लगे हैं. हालाँकि हद से ज्यादा व्यस्त हो चुके जीवन में अब रोजमर्रा के रूटीन को तोड़ने और कुछ अलग करने की भावना वैसी नहीं रह गई है. लेकिन पहली जनवरी की बात ही कुछ और है. यह सुबह की अच्छी शुरुआत की तरह ही अब भी महत्वपूर्ण माना जाता है. सभी लोग चाहते हैं कि वर्ष का पहला दिन खुशी-खुशी इस तरह…

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