टिकुली आर्ट से सजेगा राजेंद्र नगर टर्मिनल, आइये जानते हैं इस खूबसूरत चित्रकला की कहानी

आज दैनिक भास्कर अखबार के पन्ने पर यह खबर दिखी कि राजेंद्र नगर स्टेशन को टिकुली आर्ट से सजाया जायेगा. मधुबनी स्टेशन से शुरू हुई अपने स्टेशनों को स्थानीय चित्रकला से सजाने की परंपरा का यह विस्तार सुखद है. टिकुली कला का जन्म पटना के आसपास के इलाके में ही हुआ है, लिहाजा इसका राजेंद्र नगर स्टेशन की दीवारों पर उतरना न सिर्फ स्टेशन को खूबसूरत बनायेगा, बल्कि इसे एक स्थानीय पहचान भी देगा. मगर क्या आप टिकुली चित्रकला और इसकी खूबियों के बारे में जानते हैं? अगर नहीं तो…

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पोलिटिकल रैलियों से लेकर मर्डर तक की सुपाड़ी लेने लगे हैं बाइकर्स गैंग

सड़कों पर लहरिया काटते हुए आड़े-तिरछे बाइक चलाने वाले युवक आपको पहली निगाह में मौत की परवाह न करने वाले सनकी युवक लग सकते हैं. मगर पटना में इन बाइकर्स की तफ्तीश करने वाले बताते हैं कि इनका गैंग बनाना तो महज ब्रांडिंग और पब्लिसिटी है. असली मकसद पोलिटिकल पार्टियों से रैली करने, हंगामा मचाने और जमीन पर कब्जा करने से लेकर मर्डर तक का ठेका लेना है. पिछले दिनों पटना में कई अपराधों में इन बाइकर्स गैंग का हाथ रहा है. पद्मावत का विरोध करने के अभियान में भी…

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सिलेबस रटाने की दुकानों के बीच पटना के बच्चों के लिए उम्मीद की किरण है किलकारी

पुष्यमित्र आज सुबह सवा नौ बजे जब तापमान सात या आठ डिग्री होगा, हमदोनों बाप-बेटी स्कूटी पर सिटसिटाये चले जा रहे थे. दस बजे तक तकरीबन 15 किमी की दूरी तय करके किलकारी भवन पहुंचना था. हमदोनों ने ढेर सारे कपड़े पहन रखे थे. हमदोनों को मालूम था कि मौसम की परेशानियों के बावजूद वहां पहुंचना है. आज तिया का वहां पहला क्लास था. कल किलकारी में नये बैच का इंट्रोडक्शन हुआ था. उनका ऑडिटोरियम खचा-खच भरा था. सीढ़ियों तक पर लोग बैठे थे. वहां हर तबके के बच्चे थे,…

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‘सौ साल में ही क्यों कूड़ाघर में बदल गया आर्किटेक्ट मूनिंग्स का रचा हुआ पटना’

जब बिहार बंगाल से अलग होकर नया राज्य बना तो एक आस्ट्रेलियाई आर्किटेक्ट जोसेफ फेरिस मूनिंग्स ने इसकी नयी राजधानी पटना के सत्ता प्रतिष्ठानों का डिजाइन किया. इनमें पटना सचिवालय, जीपीओ और संभवतः राजभवन, विधानसभा वगैरह का पूरा इलाका है. यह सचमुच बहुत खूबसूरत है. आज भी है. मगर जिस तरह दिल्ली के लोग इंडिया गेट, राष्ट्रपति भवन को लटियन जोन के रूप में याद करते हैं, चंडीगढ़ शहर के लोगों के मन में ला काबूजियर को लेकर एक सम्मान का भाव है, पटना वासी न मूनिंग्स को याद करते…

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पटना के बाबर इमाम से पूछिये ग़ालिब कौन हैं

पुष्यमित्र पूछते हैं वो कि ‘ग़ालिब’ कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या। ग़ालिब का यह शेर काफी मशहूर है. मगर मियां ग़ालिब को उसके ही मुल्क में कितने लोग जानते समझते हैं. उर्दू के चार हजार और फ़ारसी के दस हजार शेरों में से बमुश्किल छंटाक भर शेर ऐसे हैं, जिन्हें समझते-बूझते और दुहराते रहते हैं. ग़ालिब के दीवान में कुछ शब्दों के मायने फुटनोट्स में लिखे रहते हैं, उनकी मदद से हम थोड़ा आगे बढ़ते हैं. मगर कितना, उनके 90 फीसदी शेर आज भी हमारे लिये अजनबी…

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मैथिली का मचान दिल्ली में ही क्यों बनता है, पटना में क्यों नहीं?

खबर आ रही है कि दिल्ली के अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेला में मैथिली पुस्तकों, लेखकों और कलाचारों के जुटान के लिए ‘मैथिली मचान’ के नाम से एक स्टॉल बुक कराया गया है. इस खबर ने सहज ही पटना के मैथिली भाषियों के मन में इस कचोट को पैदा कर दिया कि यह मचान पटना पुस्तक मेला में क्यों नहीं बना. पटना जो बिहार की राजधानी है, वहां लगातार मैथिली का सम्मान घटता जा रहा है, जबकि देश की राजधानी दिल्ली में पिछले दिनों लगातार मैथिली मजबूत हुई है. इस सवाल को…

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पहली पुण्यतिथि- पटना में मोबाइल की टिमटिमाती रोशनी में बोलते रहे अनुपम मिश्र

निराला बिदेसिया कोई पांच साल हुए. अनुपम मिश्र पटना आये थे. अपने पिता और हिंदी के मशहूर कवि भवानी प्रसाद मिश्र के नाम पर हो रहे एक आयोजन में भाग लेने. पटना वे आते रहते थे. बिहार भी. थोड़ा अंतराल हो जाता था. लेकिन समय के अंतराल से सरोकार कम नहीं हुआ. बिहार से उन्होंने एकाकार होनेवाला रिश्ता रखा. बिहार पर उनका अपना स्वतंत्र चिंतन था, गहरा अध्ययन भी. इसे दो महत्वपूर्ण उदाहरणों से समझ सकते हैं. दरभंगा के तालाबों की कहानी का जिस तरह से उन्होंने दस्तावेजीकरण किया, सीता…

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तो क्या अन्ना अब दीघा के कब्जाधारियों के लिए भी सत्याग्रह करेंगे?

बिहार कवरेज डेस्क खबर है कि अन्ना हजारे एक-दो दिन में पटना आने वाले हैं और खबर यह भी है कि उनके लोकल सपोर्टरों का एक धड़ा उन्हें राजीव नगर-दीघा के उन कब्जाधारियों की लड़ाई को नेतृत्व देने के लिए उकसा रहा है, जो कई सालों से आवास बोर्ड की जमीन पर कब्जा जमाकर बैठे थे. और जब सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश पर उस जमीन को कब्जामुक्त कराया तो उनलोगों ने संगठन बनाकर वापस उस जमीन पर कब्जा मांगना शुरू कर दिया है. कहा जा रहा है, अन्ना…

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अब बताइये, यह लड़की अपने नंबर घटवाने के लिए परेशान है

ऐसे किस्से आपने खूब सुने होंगे कि किसी छात्र को परीक्षा में उम्मीद से कम नंबर आ गये और वह नंबर बढ़वाने के लिए बोर्ड में आवेदन दे रहा है, आरटीआई कर रहा है, कोर्ट जा रहा है. मगर यह बिल्कुल अलग किस्सा है. एक लड़की इसलिए परेशान है कि उसे बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने जरूरत से अधिक नंबर दे दिये हैं. वह नंबर घटवाने के लिए परीक्षा समिति के दफ्तर का चक्कर लगा रही है. यह कारनामा भागलपुर जिले की छात्रा प्रियंका के साथ हुआ है. दरअसल बिहार…

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जो भोजपुरी फिल्म मुम्बई के बीस-बीस थियेटरों में लगती है, उसे पटना वाले एक शो तक नहीं देते

धनंजय कुमार भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में पटकथा लेखक हैं और पूरी कोशिश में जुटे हैं कि भोजपुरी फिल्मों का कंटेंट बदले. इसमें सामाजिक मसले जगह पायें. मगर उनका दर्द यह है कि पटना का एलीट वर्ग भोजपुरी को अपनाने के लिए तैयार नहीं है. उनकी फिल्म सैंया सुपरस्टार जो गांव में भ्रष्टाचार के मसले पर बनी है, उसे बिहार के दूसरे जिलों में 70 से अधिक सिनेमाघरों में जगह मिली है. मुम्बई में भी 20 से अधिक हॉल में यह रिलीज हुई है. मगर पटना में उसे एक शो तक…

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