पढ़िये, सच्चिदानंद सिंह की कहानी ‘पकड़वा’

इस पुस्तक मेले में साहित्यिक रचनाओं से जुड़ी कई किताबें आयीं, इनमें से ब्रह्मभोज सबसे अलग इसलिए है, क्योंकि इसकी कहानियों में पुराना क्लासिकल अंदाज तो है ही, नये जमाने की नयी सोच भी शामिल है. भूले-बिसरे दिनों की छौंक के बीच से कुछ ऐसे किस्सों को निकाल कर लेखक सच्चिदानंद सिंह लाते हैं, जो आज भी आपको उतना ही आकर्षित करती है. आज छुट्टी के दिन आप आराम से पढ़िये उनकी इस संग्रह की एक कथा पकड़वा… सच्चिदानंद सिंह भागलपुर विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के रहने के लिए छात्रावास तो…

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