वुलर झील में एक छोटा सा स्कूल और कश्मीर के सवालों का ‘नोटबुक’

पु्ष्यमित्र चिनार के पत्ते जब नोटबुक में पड़े मिलते हैं तो मीठी यादें जगाते हैं, अगर उनका सूखा ढेर बिखरा हो तो वे सुलग भी उठते हैं और सबकुछ तबाह कर देते हैं। यही तो कहानी है आज के कश्मीर की। धरती का स्वर्ग माने जाने वाले कश्मीर में इन दिनों शोलों के भड़कने का मौसम है। मगर कल रिलीज हुई फ़िल्म ‘नोटबुक’ शबनम की तरह ठंडे हाथों से जख्मों को सहलाती हुई हमारे मन में मीठा प्रेम जगाती है। गुलज़ार की माचिस से लेकर, फ़िज़ा से होते हुए हैदर…

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