रात में पार्टी, दिन में हनुमान जी, हम तो ऐसे मनाते हैं हैप्पी न्यू इय़र

नवहिंदुवादियों का एक धड़ा पिछले कुछ सालों से चैत्र प्रतिपदा को नव वर्ष के रूप में स्थापित कराने में जुटा है, मगर जो ठेठ हिंदू समाज है वह न जाने क्यों अंगरेजों के नव वर्ष पर मंदिरों में उमड़ने लगता है. आज मंदिरों में जैसी भीड़ है वैसी किसी पर्व त्योहार पर ही दिखती है. यह इस बात की निशानी है कि भले यह अंगरेजों का नया साल हो, यह हमारे खून में पूरी तरह से घुल गया है. पढ़ें इस मसले पर आशुतोष पांडेय जी आरा वाले का आलेख…

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