सात साल तक बिना पेशी के जेल में पड़े रहे, दो दिन पहले पेश हुए तो अदालत ने कहा इनके खिलाफ कोई मुकदमा नहीं है

बिहार कवरेज यह पिछले सात साल से जेल में बंद कथित नक्सली नेता विजय आर्य की कहानी है. पुलिस और सरकार कहती है कि वे नक्सली हैं, जबकि उनके परिवार वाले कहते हैं कि वे एक राजनैतिक-सामाजिक कार्यकर्ता हैं. सामंतों के कुकर्मों के खिलाफ गरीबों के हक की लड़ाई लड़ते रहे हैं. वर्षों से बंद पड़े गुरारू चीनी मिल के मजदूरों के हक की लंबी लड़ाई उन्होंने लड़ी है. इसी संघर्ष की ताकत से घबराकर तत्कालीन बिहार सरकार ने उन्हें नक्सली घोषित कर दिया है. बहरहाल सवाल यह नहीं है…

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