दिल्ली में हर पेड़ पर्यावरण के हक में डटा सिपाही है, हम अपने ही रक्षकों की अकारण बलि कैसे दे सकते हैं

पेड़ लगाओ-पेड़ लगाओ आओ भैया पेड़ लगाओ सब मिलजुलकर पेड़ लगाओ गड्ढा खोदो पेड़ लगाओ   पेड़ बताओ क्या देता है पंथी को छाया देता है सबको साफ हवा देता है चिड़ियों को वह घर देता है. तकरीबन 29-30 साल पहले की बात है, जब मैंने यह कविता लिखी थी. अपने स्कूल के एक प्ले के लिए, जिसका नाम था पेड़वा कटाइल हो रामा. इस प्ले का प्रदर्शन बाद में रांची के बिरसा स्टेडियम में भी हुआ था, जिसे तीसरा पुरस्कार मिला था. आज याद करता हूं तो लगता है…

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