कहानी राजा, महाराजा, महाराजाधिराज के उपाधियों की, भाया राज दरभंगा

सुशांत भास्कर कहा जाता है कि मुगलों के शासनकाल में  तिरहुत का राज्य संस्थापक महेश ठाकुर को मिला जिन्होंने मुगल बादशाह को समय समय पर नजराना देना शुरू किया … कालान्तर में नरपति ठाकुर के पुत्र विष्णु ठाकुर को मुगल शासक ने लगातार लड़ाई करने के कारण सिंह की उपाधि दी थी. 1860 में महाराजा महेश्वर सिंह के मरने के बाद लक्ष्मीश्वर सिंह के नाबालिग होने के कारण दरभंगा कोर्ट ऑफ वार्ड्स के अधीन चला गया था और यहाँ ब्रिटिश शासन की ओर से मुजफ्फरपुर के डिप्टी कलक्टर मिस्टर सीपी…

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नालंदा के खंडहर ही नहीं दरभंगा की हेरिटेज बिल्डिंग्स भी हमारी धरोहर हैं

सुशांत भास्कर बिहार में जब पुरातात्विक एतिहासिक धरोहर की चर्चा करते हैं तो अक्सर गया, बोधगया,  नालंदा, पटना और वैशाली जैसे कुछ क्षेत्रों पर आकर ठहर जाते हैं, जबकि पुरावस्तुओं के संबंध में बने अधिनियम, 1972 के अनुसार कम से कम एक सौ वर्ष से विद्यमान सिक्के,  भवन, कलाकृतियों, ऐतिहासिक महत्व की कोई वस्तु, पदार्थ या चीज़ आदि शामिल हैं. भारत सरकार के द्वारा बनाये गये पुरावशेष तथा बहुमूल्य कलाकृति अधिनियम, 1972 सम्पूर्ण भारत मे लागू है. 1976 में बिहार सरकार ने बिहार प्राचीन स्मारक अवशेष तथा कलानिधि अधिनियम ,1976…

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“बुझलियै, रैय्याम चीनी मील खुजै बला छै”

आदित्य मोहन झा कुछ ही दिन पहले धनकटनी करके पंजाब से लौटा ‘जोगिया’ आज बहुत खुश था. सांझ में जब गामक हाट से लौटा तो उसके पास घर वालों को बताने के लिए एक खबर थी. ‘मैनाबाली’ को सब्जी का झोरा धराने वक्त माथ से गमछा हटाते हुए वो सब कुछ एक ही बार में कह देना चाहता था. लेकिन फिर उसने उसे जल्दबाजी में इशारा किया चमरटोली के बीच मे बने बाँसक मचान की तरफ आने को और स्वयं आगे बढ़ गया. बकरी-छकरी, भैंस, अधनंगे बच्चों, खाँसते बूढ़े-बूढीयों, घूर-धुआं,…

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