“बुझलियै, रैय्याम चीनी मील खुजै बला छै”

आदित्य मोहन झा कुछ ही दिन पहले धनकटनी करके पंजाब से लौटा ‘जोगिया’ आज बहुत खुश था. सांझ में जब गामक हाट से लौटा तो उसके पास घर वालों को बताने के लिए एक खबर थी. ‘मैनाबाली’ को सब्जी का झोरा धराने वक्त माथ से गमछा हटाते हुए वो सब कुछ एक ही बार में कह देना चाहता था. लेकिन फिर उसने उसे जल्दबाजी में इशारा किया चमरटोली के बीच मे बने बाँसक मचान की तरफ आने को और स्वयं आगे बढ़ गया. बकरी-छकरी, भैंस, अधनंगे बच्चों, खाँसते बूढ़े-बूढीयों, घूर-धुआं,…

Read More