नहीं टूटा मिथक. झारखंड के इस राजकीय महोत्सव का नाम आते ही मुख्यमंत्रियों के छूटते हैं पसीने

-डॉ आरके नीरद झारखंड के इस राजकीय महोत्सव का नाम आते ही मुख्यमंत्रियों के पसीने छूट जाते हैं. रघुवर दास ने भी खुद को इसका अपवाद साबित करने का मौका चौथी बार भी गंवा दिया. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जो साहस नोएडा जाकर दिखाया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिसके लिए उनकी जम कर प्रशंसा की, झारखंड के मुख्यमंत्री वह साहस नहीं कर सके. 16 फरवरी से झारखंड की उपराजधानी दुमका में राजकीय जनजातीय हिजला मेला महोत्सव शुरू हुआ है. यह मेला 1890 में शुरू हुआ था…

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आजाद भारत के पहले नव वर्ष में क्यों गिरा दी गयी थीं दो हजार आदिवासियों की लाशें?

आज हैप्पी न्यू इयर के मौके पर क्या आप आजाद भारत के पहले नव वर्ष की कहानी सुनना चाहेंगे? अगर हां तो आपको झारखंड के खरसावां चलना पड़ेगा… जहां आज ही के दिन ऐसा कांड हुआ था जो जलियावाला बाग कांड से भी अधिक नृशंस था. और हैरत की बात है कि यह कांड किसी विदेशी शासक ने नहीं बल्कि आजाद भारत की सरकार ने किया था. हाट में पहुंचे दसियों हजार निहत्थे आदिवासियों पर गोली चलायी गयी थी और गैर सरकारी आंकड़ों के हिसाब से दो हजार आदिवासियों को…

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‘भूख’ पर चुप्पी, ‘दुलार’ पर हंगामा, यह कैसी झारखंडी राजनीति है?

पाकुड़ में पिछले दिनों हुई चुंबन प्रतियोगिता की वजह से आज-कल झारखंड की राजनीति में उबाल आया हुआ है, विधानसभा तक में इससे जुड़े सवाल उठाये जा रहे हैं. जांच कमिटी तक बन गयी है. इसी झारखंड में जब पिछले दिनों एक बच्ची भात-भात कह कर मर गयी थी, तब किसी के खून में उबाल नहीं आया था. झारखंडी राजनीति की इसी विडंबना पर स्वतंत्र पत्रकार मनोरमा सिंह ने बड़ा मौजू सवाल उठाया है. मनोरमा सिंह 17 साल का झारखंड विकास के तमाम दावों के बावजूद अपने लक्ष्य से काफी…

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