तो क्या मोदी अविजेय हैं?

व्यालोक पाठक एक शब्द में इसका एक जवाब हो सकता है – नहीं. आखिर, हमारे पास दिल्ली और बिहार के नतीजे हैं दिखाने को. बिहार में तो चलिए डेढ़ साल बाद ही सही, पर अपने पुराने साथी नीतीश कुमार के साथ मिलकर भाजपा ने सरकार में साझीदारी तो कर ली है. दिल्ली का नासूर तो रह-रहकर प्रधानमंत्री के कलेजे में भी टीस देता ही होगा. यह बात भी दीगर है कि मई 2014 से अब तक जितने भी विधानसभा चुनाव हुए हैं, उनको टीवी चैनलों और आरामकुर्सी पर पसरे विशेषज्ञों…

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गुजरात का ‘ज’ और जिग्नेश की ‘जमात’ की राजनीति

शिरीष खरे (सामाजिक मुद्दों पर जमीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने-जाने वाले शिरीष तहलका समेत कई मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे हैं.) जिग्नेश के रहने का अंदाज और पहनावा उन्हें मुख्यधारा के नेताओं से अलग करता है. उनकी जिंदगी के दूसरे पहलू भी उन्हें बाकी नेताओं से जुदा करते हैं. और सबसे हटकर उनमें जो बात दिख रही है वह है उनकी जाति से हटकर ‘जमात’ की राजनीति. उनकी शख्सियत उन्हें स्वाभाविक तौर पर इसी राजनीति से जोड़ रही है. यह सच है कि गुजरात में दलितों की आबादी कोई 7…

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