‘महज तीन निर्दोष चिट्ठियों की सजा बीस साल तक भुगतते रहे जगन्नाथ मिश्र’

प्रत्युष सौरभ राजा कल जैसे ही चारा घोटाला के देवघर ट्रेजरी मामले में डॉ जगन्नाथ मिश्र की रिहाई की खबर आयी, राजनीतिक हलकों में यह बात जोर-शोर से यह बात कही जाने लगी कि अगर लालू दोषी हैं तो डॉ मिश्र निर्दोष कैसे. दरअसल जैसे ही चारा घोटाला का नाम आता है, लोग बिना तथ्य और सच्चाई जाने यह मान लेते हैं कि डॉ जगन्नाथ मिश्र पर भी चारा घोटाले में गलत तरीके से सरकारी खजाने से पैसा निकालने के आरोप हैं. जबकि सच्चाई यह है कि चारा घोटाला डॉ…

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यह कैसा न्याय है? लालू तो ‘ललुआ’ हो जाते हैं, जगन्नाथ ‘बाबू’ ही रह जाते हैं

सवाल सिर्फ सीबीआई की जांच और अदालती प्रक्रियाओं का नहीं है, मीडिया और बौद्धिक समाज का भी है. जिसके लिए घोटाला का आरोप लगते ही लालू ‘ललुआ’ हो जाता है. जबकि देश में सैकड़ों नेता भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद सम्मानित तरीके से पुकारे जाते रहे हैं. राजनीतिक अध्येता जयंत जिज्ञासू मानते हैं कि इसके पीछे मीडिया और सवर्ण समाज का अपना पूर्वाग्रह है. चारा घोटाला तो एक बहाना था, जिसकी सूली पर लालू को लटका कर सामाजिक न्याय की प्रक्रिया को रोकने और लालू की वजह से उठे बिहार…

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