पनिया के जहाज से पलटनिया बनि अइहौ पिया…

खबर आई है कि बिहार की सात बड़ी नदियों को केंद्र सरकार ने अपनी राष्ट्रीय जलमार्ग परियोजना में शामिल कर लिया है. इस परियोजना में जहां देश भर की 111 नदियां हैं, बिहार की गंगा, कोसी, गंडक, घाघरा, सोन, पुनपुन और कर्मनाशा नदी भी है. एक बार यह परियोजना पूरी हो जाये तो फिर इन नदियों में भी पानी के जहाज चलेंगे. गंगा में तो चल भी रहे हैं. बंगाल के हल्दिया से यूपी के इलाहाबाद तक 1620 किमी लंबा राष्ट्रीय जलमार्ग एक है, जिसका बड़ा हिस्सा बिहार में पड़ता…

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यहां आज भी अपने घर का सपना सीमेंट-बालू से नहीं बांस से पूरा होता है

कोसी के इलाके में बांस का इस्तेमाल किस-किस रूप में होता है, आप उसकी कल्पना भी नहीं कर सकते. यह तसवीर सुपौल के एक स्कूल की है, जो पूरी तरह बांस से बनी है. तसवीर डाउन टू अर्थ से साभार… मिथिलेश कुमार राय बांस के बारे में कभी कुछ सुनता हूँ तो आँखों के सामने हठात् ही कुछ दृश्य कौंध जाते हैं. कुछ दिन पहले की बात है. कपलेश्वर की विधवा कह रही थीं कि उस दिन कुछ बाँस बिक गए तो थोड़े से पैसे आए हैं हाथ में. सोच…

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बुकानन से क्रिस्टोफर हिल तक, सृजनशील लोगों को क्यों अपनी तरफ खींचती है कोसी?

कोसी नदी पर महत्वपूर्ण पुस्तक ‘रिवर ऑफ सोरो’ लिखने वाले क्रिस्टोफर हिल ने कल एक पोस्ट लिख कर बताया कि पूर्णिया और कोसी नदी से संबंधित अपनी तमाम शोध सामग्रियों को यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया की लाइब्रेरी में रख छोड़ा है. अगर कोई व्यक्ति इस मसले पर शोध करे तो यहां आकर इन सामग्रियों का इस्तेमाल कर सकता है. यह प्रसंग आया तो इतिहास औऱ साहित्य के गंभीर अध्येता, सेंटर फॉर सोशल स्टडीज के एसोसियेट प्रोफेसर सदन झा के मन में सहज ही यह जिज्ञासा उठी कि आखिर कोसी नदी और…

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19-20 साल ने इन दो लड़कों ने कहा, आइये करें कोसी के सवालों पर बात

बाढ़, पलायन, अशिक्षा और भीषण गरीबी से जूझने वाला कोसी क्षेत्र हर साल मानसून के सीजन में मीडिया की सुर्खियां बटोरने लगता है. अचानक कई कोसी विशेषज्ञ सामने आ जाते हैं. बाढ़ का पानी जब तक गांवों को डुबोता रहता है, कोसी चर्चा भी तभी तक होती है. बाढ़ का पानी उतरते ही मीडिया से कोसी चर्चा भी उतर जाती है. कभी ऐसा नहीं होता कि लोग एकजुट होकर बतियायें कि कोसी क्षेत्र की यह हालत क्यों है? इसका समाधान क्या है? अगले साल पहली दफा यह काम होने जा…

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