नई एमएसपी राहत तो देगी, मगर डेढ़ गुना वाली बात भद्दा मजाक है

मोदी सरकार ने किसानों के उपज की एमएसपी बढ़ा दी है. यह एमएसपी सौ-दो सौ टका बढ़ा कर सरकार कह रही है कि अब किसानों को उसकी लागत का डेढ़ गुना मिल जायेगा. हालांकि आज देश के किसान जिस स्थिति में हैं, उसमें उन्हें जो भी मिल जाये वह लाभ ही है. मगर यह कहना कि उन्हें उनकी लागत का डेढ़ गुना मिलेगा एक क्रूर मजाक है. दुखद तो यह है कि सरकार ने ऐन चुनावी साल में ऐसी घोषणा करते हुए यह भी नहीं बताया कि उन्होंने किसानों की…

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अजब हैं बिहार के किसान, न आंदोलन करते हैं, न आत्महत्या, बस ट्रेन पकड़ के पंजाब निकल लेते हैं

पुष्यमित्र मुम्बई के किसान आंदोलन से याद आ गया, हमारे बिहार में भी किसान हैं. और हमारे वाले जो किसान हैं, वे अद्भुत हैं. वे कमाने के लिए भले ही पंजाब, दिल्ली, बंबई, मद्रास या श्रीनगर चले जायें, मौका मिले तो मिडिल ईस्ट भी घुस जायें, लेकिन आंदोलन के लिए पटना भी नहीं पहुंचते. पटना तभी आते हैं, जब लालू जी फिरी में रैली के लिए बुलाते हैं. अपने मसलों के लिए नहीं. अभी घर गया था तो पता चला कि पूरे इलाके में जहां-तहां मकई के भुट्टे से दाना…

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फसल मुआवजा का पैसा खजाने में, किसान सड़क पर, कौन लड़ेगा बिहार के खेतिहरों की लड़ाई?

P.M. पिछले दिनों महाराष्ट्र के अकोला से खबर आय़ी थी कि पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा वहां के किसानों की लड़ाई की लड़ाई लड़ने के लिए सड़क पर उतर गये हैं. उनके समर्थन में अरुण शौरी, वरुण गांधी और शत्रुघ्न सिंहा जैसे दिग्गज भाजपा नेता पहुंच रहे हैं. हालांकि वहां के किसानों की समस्या बहुत बड़ी नहीं थी, यह सुनकर अच्छा लगा कि भाजपाई भी अब किसानों के मुद्दे पर सड़क पर उतर रहे हैं. वहीं बिहार में किसान रोज सरकार के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर…

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अकोला में जमीन पर उतर गये यशवंत, क्या यह लड़ाई रंग लायेगी?

P.M. दो दिन पहले पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री किसानों की लड़ाई का साथ देने अकोला पहुंच गये. वे वहां उनके साथ जमीन पर सोये नजर आये. बाद में पुलिस ने उन्हें और उनके 250 समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया और थाने में पांच घंटे रखा. दिलचस्प है कि यह लड़ाई एक ऐसे राज्य महाराष्ट्र में हो रही है, जहां भाजपा सत्ता में है. और उनकी किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ एक वरिष्ठ भाजपा नेता सड़कों पर है. सरकार न उनकी बात सुनने को तैयार है और न ही कोई उनसे…

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खेत में खड़ा है गन्ना और खरीदार कोई नहीं, बताइये क्या करे किसान?

यह एक ऐसा मसला है जिसे किसान हुए बगैर समझा नहीं जा सकता. बिहार के सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर और पूर्वी चंपारण जिलों के 35 हजार किसान इस साल अजीब किस्म की आपदा का सामना कर रहे हैं. उनके खेतों में तकरीबन 40 लाख क्विंटल गन्ना खड़ा है. यह उनकी साल भर की मेहनत का नतीजा है. मगर इस मेहनत को कीमत देने वाले एकमात्र चीनी मिल ने इस गन्ने को खरीदने का कार्यक्रम अनिश्चित काल के लिए टाल दिया है. खबर है कि सीतामढ़ी की रीगा चीनी मिल खुद बिकने…

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