चुनाव डायरी-तो सीमांचल बन जाता बिहार का टी-हब

पुष्यमित्र कई साल पहले टी बोर्ड ने बिहार के सीमांचल के कुछ जिलों में सर्वेक्षण किया था और अपनी रिपोर्ट में कहा था कि किशनगंज जिले के पांच प्रखंड और अररिया-पूर्णिया जिले के कुछ इलाकों में चाय की खेती आराम से हो सकती है. हालांकि उससे पहले ही किशनगंज जिले के कुछ इलाके में चाय की खेती शुरू हो चुकी थी. उस वक्त ऐसा लगा था कि बहुत जल्द यह इलाका अपने चाय बगानों की वजह से असम और दार्जिलिंग की तरह मशहूर हो जायेगा और तकरीबन सालों भर रोजगार…

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किशनगंज में आखिर क्यों कोई एनडीए नेता चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं है?

जी हां, यह अजीब सिचुएशन है. किशनगंज पहुंचते ही इस सिचुएशन का पता चला. यहां के स्थानीय पत्रकारों ने बताया कि भले ही देश में भाजपा और एनडीए की तूती बोल रही हो. उसके टिकट के लिए मारामारी चल रही हो, मगर किशनगंज लोकसभा सीट से कोई बड़ा एनडीए नेता चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं है. बीजेपी से एक बार लोकसभा चुनाव लड़े चुके पार्टी के कोषाध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने भी अब मना कर दिया है, वे चाहते हैं कि उन्हें किशनगंज छोड़कर किसी दूसरे सीट से टिकट दिया…

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मैं किशनगंज हूं, सोने की चिड़िया के सुर्खाब परों के जैसा

फिरोज किशनगंज के रहने वाले हैं, जेएनयू से स्पेनिश की पढ़ाई की है और अभी चेन्नई शहर में एक निजी शहर में कार्यरत हैं. उनके दिल में किशनगंज बसता है. वे हमेशा अपने शहर, अपने इलाके को याद करते हैं. पढ़िये, उन्होंने इस पोस्ट में किशनगंज को किस शिद्दत से याद किया है. फिरोज आलम मैं किशनगंज हूँ. सीमांचल की गोद मे बैठा एक अनाथ, एक अछूत हूँ, एक कमज़ोर व बीमार पहचान हूं, इसलिए साल के पहले दिन भी खामोश हूँ. अब तो बस बिस्तर पर पड़े किसी रोगी…

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