कर्पूरी ठाकुर, जगन्नाथ मिश्रा और लालू यादव

आदित्य मोहन झा कर्पूरी ठाकुर, जगन्नाथ मिश्रा और लालू यादव। मौजूदा बिहार की जातिगत-राजनीति के वो बीज जिन्हें या तो कोई अच्छा कह सकता है या बुरा, इग्नोर नहीं कर सकता। आज का दिन तीनों पूर्व मुख्यमन्त्रियों के लिए महत्वपूर्ण है। कर्पूरी ठाकुर जी का जन्मदिन है और लालू जी सँग जगन्नाथ जी को भी जेल हो गयी है। कर्पूरी और लालू दोनों उसी ब्राह्मण व्यवस्था के खिलाफ खुद को कहते थे जिसका प्रतिनिधी शायद वो जगन्नाथ मिश्रा को बताते थे। ये सच जरूर है की बिहार के जातिगत बेड़ियों…

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अपमान का घूंट पीकर बदलाव की इबारत लिखने वाला योद्धा #कर्पूरीजयंतीविशेष

जयन्त जिज्ञासु (लेखक ) पिछड़ों-दबे-कुचलों के उन्नायक, बिहार के शिक्षा मंत्री, एक बार उपमुख्यमंत्री(5.3.67 से 31.1.68) और दो बार मुख्यमंत्री (दिसंबर, 70– जून, 71 एवं जून, 77-अप्रैल, 79) रहे जननायक कर्पूरी ठाकुर (24.1.1924 – 17.2.88) के जन्मदिन की आज 94वीं वर्षगांठ है. आज़ादी की लड़ाई में वे 26 महीने जेल में रहे, फिर आपातकाल के दौरान रामविलास पासवान और रामजीवन सिंह के साथ नेपाल में रहे. 1952 में बिहार विधानसभा के सदस्य बने. शोषितों को चेतनाशील बनाने के लिए वो अक़्सर अपने भाषण में कहते थे- उठ जाग मुसाफिर भोर…

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