नथुने में गोबर की गंध जाते ही याद आता है, अरे आज तो कोई त्योहार है

मिथिलेश कुमार राय गोबर का जिस अर्थ में प्रयोग गुड़ के साथ होता है या गणेश के साथ, गांव में यह वैसा ही नहीं रह जाता है. गुड़ अपनी जगह ठीक है और गनेश तो हैं ही. लेकिन यहां गोबर भी इससे कम महत्व का नहीं होता. विश्वास न होता हो तो त्योहार के दिनों में बगल के किसी गांव में घूम आइए. गोबर के वैसे तो बहुत से काम होते हैं. जैसे इसका उपले थोप लीजिये. इसे सड़ा कर खाद बना लीजिए. गोब गैस की परिकल्पना तो है ही.…

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