छात्र-राजनीति की उपज नीतीश कुमार छात्रों के जगने से इतना डरते क्यों हैं?

आदित्य मोहन झा

(लेखक मिथिला स्टूडेंट यूनियन के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी हैं.)

बिहार के मौजूदा सरकार और विपक्ष में भी आज जो भी राजनेता हैं कभी वो छात्र राजनीति के उपज रहे हैं पर कालांतर में छात्रसंघ चुनावों को बंद कर दिया गया ताकि इनका कम्पीटिशन और सवाल करने वाली नेताओं की नई पौध विकशित ही न हो.

15 नवंबर को #LNMU में मिथिला स्टूडेंट यूनियन का जो छात्र आंदोलन हुआ था वो विश्वविद्यालय के कुव्यवस्थाओं के खिलाफ हुआ था पर इसे अपार जनसमर्थन-मीडिया कवरेज मिला. नियमित क्लास-नियमित सत्र-लायब्रेरी-लेबोरेट्री-स्पोर्ट्स-कल्चरल इवेंट्स-रिक्त शैक्षणिक पदों पर भर्ती-सही समय पर कैरीकुलम, परीक्षा और रिजल्ट्स जैसे बेसिक मांगों को विश्वविद्यालय प्रशासन ने लिखित माना. आंदोलन के तीन दिन बाद ही राज्यपाल महोदय ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को आदेश दिया की इन मांगों को हर जगह पूरा किया जाए और छात्रसंघ चुनाव करवाने के निर्देश दिए.

एलएनएमयू के अलावा बीएनएमयू मधेपुरा, बीआरएयू मुजफ्फरपुर, टीएमएनयू भागलपुर, वीकेएसयू आरा, जेपीएनयू छपरा आदि बिहार के हर विश्वविद्यालय में अब छात्रों में असंतोष बढ़ता जा रहा है. हर विश्वविद्यालय के हालात अव्यवस्थित है और छात्र ग़ुस्से में हैं. एलएनएमयू के तरह का आंदोलन उन जगहों पर भी धीरे-धीरे अंकुरित होगा. इस चीजों को रोकने के लिए ही नीतीश कुमार नए खेल खेल रहे हैं.

चूंकि ये सब आंदोलन और आवाज एलएनएमयू से शुरू हुआ इसलिए वो इसे तोड़के नया विश्वविद्यालय बनाना चाहते हैं. एमएसयू ने पिछले तीन सालों में छात्र और क्षेत्र से जुड़े यूनिवर्सिटी, डीएमसीएच, चीनी मिल, एयरपोर्ट जैसे वैकाशिक हर मुद्दे पर इन्हें घेरा है इसलिए ये एमएसयू के आंदोलन को ही कमजोड़-तोड़ देना चाहते हैं. वैसे भी ये जानते हैं की एमएसयू राज्य के हर विश्वविद्यालय के छात्रों को कुव्यवस्थाओं के खिलाफ खड़ा करना चाहती है इसलिए ये बेगुसराय के कॉलेजों को मुंगेर विश्वविद्यालय में डालना चाहते हैं ताकि एलएनएमयू की ताकत घट जाए.

मुंगेर विश्वविद्यालय स्थापना की एमएसयू समर्थक है ताकि मुंगेर, जमुई, बांका आदि जिलों को फायदा हो पर बेगुसराय स्वयं सिमरिया में ‘दिनकर विश्वविद्यालय’ का अधिकारी है ताकि बेगुसराय, खगरिया और समस्तीपुर जिलों के छात्रों को आसानी हो. इस चाल से वो दिनकर विश्वविद्यालय की माँग और एलएनएमयू को कमजोड़ करने की साजिश कर रहे हैं.

एमएसयू इस फैसले का कड़ा विरोध करेगी. मुंगेर में विश्वविद्यालय जरूर स्थापित हो पर जबतक बेगुसराय के सिमरिया में दिनकर विश्वविद्यालय स्थापित नहीं होता तबतक बेगुसराय के कॉलेज एलएनएमयू में ही रहना चाहिए.

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