सलाम कीजिये इन बच्चियों को, इन्होंने अपनी सहेली को बाल विवाह का शिकार होने से बचाया

बिहार कवरेज

बाल विवाह को लेकर राज्य सरकार मानव श्रृंखला जैसे तामझाम तो खूब करती है, मगर जमीन पर कोई बच्ची बाल विवाह का शिकार हो रही हो तो उसे बचाने की कोई सटीक व्यवस्था नहीं है. यह बात तब जाहिर हुई जब गया में बाल विवाह का शिकार हो रही एक बच्ची को बचाने के लिए उसकी सहेलियों ने हेल्पलाइन पर फोन किया मगर किसी ने फोन नहीं उठाया. बाद में इन लड़कियों ने खुद थाने जाकर शिकायत की और अपनी सहेली को बाल विवाह का शिकार होने से बचाया. इस पूरे प्रकरण में सबसे अच्छी बात यह है कि जहां पूरा समाज इस बाल विवाह के लिए मानसिक रूप से तैयार था, उसकी 30 सहेलियां एकजुट थी कि अपनी सहेली को इस कुप्रथा का शिकार नहीं होने देना है.

यह कहानी गया के बाराचट्टी की है. आठवीं कक्षा की एक बच्ची की शादी उसके माता-पिता ने एक उम्रदराज विधुर से तय की गयी थी. वह लड़की शादी के लिए तैयार नहीं थे मगर ना सिर्फ उसका परिवार बल्कि समाज के लोग भी सहमत थे कि यह शादी ठीक ही है. शादी के कार्ड तक छप गये थे और 18 फरवरी को उसकी शादी होनी थी.

फिर उस बच्ची ने अपनी सहेलियों को इस घटना की जानकारी दी. उसके स्कूल की तीस सहेलियों ने तय किया कि किसी भी तरह से इस शादी को रोकना है. इन लड़कियों ने सबसे पहले तो हेल्पलाइन पर फोन करने की कोशिश की. मगर फोन बजता रहा किसी ने उठाया नहीं. फिर ये लड़कियां बाराचट्टी थाना पहुंच गयीं. वहां से थानेदार को लेकर गांव पहुंची.

पुलिस के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार परिवार वाले मान गये हैं कि वे अपनी बच्ची की शादी 18 की उम्र होने के बाद ही करायेंगे. परिवार वालों का कहना था कि उनके यहां चार-चार लड़कियां हैं, इसलिए वे कम उम्र में ही सबका विवाह करा देना चाहते हैं. क्योंकि लड़की की उम्र अधिक होने पर दहेज अधिक देना पड़ता है.

जाहिर सी बात है कि हमें बाल विवाह के साथ-साथ दहेज प्रथा का भी विरोध करना पड़ेगा. क्योंकि कई बार इसी तरह लड़कियां दहेज से बचने के लिए कम उम्र में ब्याह दी जाती हैं. बहरहाल इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने लड़कियों की तारीफ की है और इन्हें पुरस्कृत करने का प्रस्ताव भेजा है.

इन दिनों ऐसा हर जगह देखा जा रहा है कि बाल विवाह के खिलाफ किशोरियां काफी मुखर हैं. कई जगह ऐसी घटनाएं सुनने को मिल रही हैं कि किशोरियां एकजुट होकर शादी रुकवा देती हैं. मुजफ्फरपुर में भी पिछले दिनों ऐसी घटना हुई थी. बगहा से पांच किशोरियों ने पत्र लिखकर सीएम से मांग की थी कि हमें बाल विवाह का शिकार होने से बचा लीजिये. सामाजिक कार्यकर्ता शाहीना परवीन कहती हैं कि अगर वाकई बाल विवाह से बचना है तो जगह-जगह किशोरियों के समूह का गठन कर सरकार को इन्हें सशक्त और जागरूक करना चाहिए. इनकी सूचनाओं पर तत्परता से कार्रवाई करना चाहिए. ये बदलाव लाने में सक्षम हैं.

 

(जानकारियां स्थानीय अखबारों से उद्धृत हैं और तसवीर जागरण से साभार)

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