ओपन जेल में रहने और गो-पालन करने में बुराई क्या है? यह तो सर्वश्रेष्ठ विकल्प है…

यह तसवीर होशंगाबाद ओपन जेल की है. देश की सभी ओपन जेल में कैदियों को इसी तरह के वन बीएचके क्वार्टर मिले हैं, जहां वे सपरिवार रहते हैं.

बिहार कवरेज

लालूजी को सजा सुनाने के बाद जज महोदय ने टिप्पणी कर दी थी कि मैं सिफारिश करूंगा कि आपलोगों को ओपन जेल भेजकर आपसे गोपालन कराने का काम लिया जाये. उन्होंने कमेंट करते हुए यह भी कहा कि आपलोगों गोपालन का अनुभव भी है. तब से जहां एक ओर मीडिया हजारीबाग ओपन जेल में लालूजी का कॉटेज तक देख आया, वहीं सोशल मीडिया में लालू समर्थकों ने इसे लालूजी के लिए हिकारत का काम मानकर जज को ट्रोल करना शुरू कर दिया. मगर मुझे समझ नहीं आता कि लालूजी जैसे मुजरिम को ओपन जेल में अगर गो-पालन करने का काम दिया जाता है, तो इसमें बुराई क्या है. यह तो सबसे अच्छा ऑप्शन होगा.

वैसे तो अगर नियम-कानून का ध्यान रखा जाये तो लालूजी को ओपन जेल में भेजा ही नहीं जायेगा. क्योंकि लालूजी वहां जाने की अहर्ता पूरी नहीं करते. भारतीय जेल व्यवस्था के हिसाब से वह सबसे अच्छी जगह है. हजारीबाग रेल में एंट्री के लिए क्या अहर्ताएं हैं यह तो मैं नहीं जानता. मगर देश के संभवतः पहले ओपन जेल बक्सर ओपन जेल में लालूजी को एंट्री नहीं मिल सकती है.

वहां रहने के लिए ऐसे ही कैदी को जगह मिलती है, जिसने अपनी आधी सजा काट ली हो, उस मामले को छोड़ कर किसी और मामले में उसका दोष सिद्ध न हुआ हो. जिसने जेल में कोई अपराध न किया हो और उसका आचरण बेहतर रहा हो. लालू जी का मामला यहीं फंस जायेगा. उन्होंने आधी सजा नहीं काटी है, और उन्हें एक अन्य मामले में छह साल की सजा हो चुकी है. बिहार में एक कमेटी है, जो ओपन जेल में रहने के इच्छुक कैदियों के आवेदन की समीक्षा करती है. इस ओपन कारा में 104 सीट हैं.

य़हां कैदियों को रहने के लिए वन बीएचके फ्लैट मिलता है. किचेन में गैस सिलेंडर, चूल्हा और बरतन का इंतजाम है. रहने के लिए चौकी औऱ बिछावन है. खेल, मनोरंजन, पढ़ने लिखने के तमाम इंतजाम हैं. वहां बंदी के साथ उसके परिवार के चार लोग रह सकते हैं. उन्हें भोजन औऱ दवा मुफ्त मिलती है. कैदी जेल से 5 किमी के दायरे में सुबह जाकर शाम तक लौट सकता है. हजारीबाग जेल में यह दायरा 15 किमी तक है. ऐसा माना जाता है कि ओपन जेल में कैदी 99 परसेंट आजाद ही रहता है. बिहार में कैदियों को एक कार्ड मिलता है जिसमें उसकी मजदूरी दर्ज होती रहती है, फिर उस कार्ड से वह अपनी जरूरत का सामान भी खरीद सकता है. ऐसे जेल में अगर पशुपालन का काम हो तो इससे बेहतर क्या हो सकता है.

2013 में खुले हजारीबाग ओपन जेल में आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों को रखा गया है. बक्सर ओपन जेल में कैसे कैदी हैं, यह जानकारी नहीं है. मगर यह तो बिलाशक सही है कि अगर जेल में रहना पड़े तो ओपन जेल में रहने का मौका मिले. और अगर सश्रम कारावास हो तो गोपालन से बेहतर क्या हो…

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