नीतीश जी विकास गिना रहे थे, बगल में चार बच्चों की लाशें पड़ी थी

आयुष कुमार

छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता,
टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता।

देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविता की इस पंक्ति को शायद उनके सबसे करीबी बिहार के सीएम नीतीश कुमार ही नही समझ पाये. गुरुवार को सहरसा में विकास यात्रा पर पहुंचे नीतीश कुमार ने विद्युत तार की चपेट में आ कर काल के गाल में समा चुके चार बच्चों के परिजनों से ना मिलने की जहमत उठाई और ना ही दो शब्द कहने की हिम्मत जुटा पाये. शायद सहरसा की जनता अपने राजा से उदार दिल की उम्मीद कर बैठी थी परंतु राजा ने अपने छोटे मन से सबको निराश कर दिया.

बच्चों की मौत के बाद आक्रोशित सहरसा की जनता

क्या है मामला

बिहार के सहरसा में गुरुवार को एक तरफ जहां पूरा जिला प्रशासन मुख्यमंत्री के स्वागत में जुटा था, तो वहीं शहर के मध्य स्थित डीबी रोड में एक हृदय विदारक घटना ने मुख्यमंत्री के आगमन के उत्साह को कम कर दिया. बीते एक जनवरी से लापता संतोष जायसवाल का आठ वर्षीय पुत्र चिराग के लापता होने के बाद गुरुवार को घर से चंद कदम की दूरी पर रेलवे पटरी किनारे शव होने की सूचना पर पहचान के लिए गयी उसकी दो बहन निधि व मुस्कान व उसकी सहेली किशोर दास की पुत्री कोमल बगल से गुजर रहे हाइ वोल्टेज बिजली तार की चपेट में आ गयी. दो मिनट के अंदर तीनों जिंदा जल गयी.वही कुल चार बच्चों की मौत से पूरे इलाके में सनसनी मच गई और दुकानें स्वत: बंद हो गयी. बिजली विभाग की लापरवाही से नाराज लोगो ने प्रशासन के खिलाफ रोड जाम कर जमकर नारेबाजी की.

सीएम साहेब को नही मिली फुर्सत

एक ओर चार बच्चों की मौत से पूरा जिला सहमा हुआ था.वही दूसरी ओर घटना के कुछ देर बाद बिहार के मुखिया नीतीश कुमार घटना से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित सुलिंदाबाद पहुँचे.पहुंचने के उपरांत सीएम ने कई योजनाओं का शिलान्यास किया और शराबबंदी से लेकर दहेजबंदी तक पर लंबे – चौड़े भाषण दे डाले. परंतु सहरसा में हुई इतनी बड़ी घटना पर दुख व्यक्त करना भी जरूरी नही समझा और ना ही सुशासन पुरुष के नाम चर्चित नीतीश कुमार ने पीड़ितों से मिलकर ढाढ़स बंधाने की जहमत उठाई.जिससे लोगो में आक्रोश व्याप्त है.

जिलेवासियों का कहना है कि सरकारी विभाग की लापरवाही की वजह से इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद राज्य के मुखिया का दुख की इस घड़ी में ढाढ़स के दो शब्द कहने के बजाय यूं चले जाना एक राज्य के सीएम पर शोभनीय नही है. वही सीएम के द्वारा पीड़ितों से नही मिलने को लेकर राजद, कांग्रेस और जाप ने भी विरोध प्रकट किया है. हालांकि मुख्यमंत्री के जाने के उपरांत आपदा मंत्री दिनेश चंद्र यादव ने पीड़ित परिजनों से जा कर मुलाकात की और मुआवजा का ऐलान कर राजनीतिक जवाबदेही की इतिश्री कर दी.इधर प्रशासन भी सीएम के परिजनों से ना मिलने से खुश ही थे. चूंकि यदि सीएम परिजनों से मिलने जाते तो उन्हें रास्ते में बिहार के कथित विकास की सच्चाई नजर आ जाती और सुलिंदाबाद की बनावटी विकास से पर्दा उठ जाता.

Spread the love

Related posts