गालिब शराब छूटती नहीं, कोसी वाले न्यू इयर मनाने नेपाल चले गये

मामला सिर्फ बिहार के नगर विकास मंत्री और उनके अंगरक्षकों का नहीं है. बिहार के युवा इस साल न्यू इयर सेलिब्रेट करने बड़ी संख्या में राज्य से बाहर गये थे. कोई बंगाल पहुंचा तो, कोई झारखंड, कोसीवालों के लिए नेपाल नजदीक था तो वे सीधे बार्डर क्रास कर गये. नेपाल की सड़कों और वहां के होटलों-पबों में किस कदर बिहारियों की भीड़ थी इसका आंखों-देखा हाल रिपोर्टर आयुष कुमार बता रहे हैं, अपनी इस रिपोर्ट में…

आयुष

आयुष

इसी साल अप्रैल में शराबबंदी के दो साल पूरे हो जायेंगे. इन दो सालों में शराबबंदी के फैसले ने बिहार से सटे नेपाल और बंगाल को मालामाल कर दिया. बिहार के जाम के शौकीन बड़े पैमाने पर घूमने के बहाने शराब का जाम छलकाने दोनों जगहों पर जाते है. जिसका नजारा बीते 31 दिसंबर को भारत-नेपाल सीमा पर सुपौल से सटे कोसी बैराज पर नजर आया. 31 दिसम्बर की सुबह से ही नेपाल से सटे सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, अररिया, पूर्णिया आदि के लोगो का हुजूम नेपाल के भंसार कार्यालय के निकट लंबी लाइनों में लगा रहा. ऐसा ही हाल जोगबनी बॉर्डर का भी रहा. यह लाइन एक जनवरी की सुबह और बढ़ने लगी. यहां यह बता दे कि भारत से नेपाल में इंट्री करने के उपरांत भंसार कटाना अनिवार्य है. यह दिनों के हिसाब से कटाया जाता है.

कोसी इलाके के लोगो के लिए नव वर्ष मनाने का सबसे पसंदीदा डेस्टिनेशन विराटनगर, धरान, भेडेतार आदि रहा. सहरसा से लगभग दो सौ किलोमीटर की दूरी पर स्थित नेपाल के धनकुट्टा जिले में स्थित भेडेतार नेपाल के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों में से एक है. खुशगवार मौसम और पहाड़ी इलाका कोसी इलाके के लोगो को नये साल में खूब पसंद आया. युवाओं की फौज दिन भर पहाड़ी माहौल में मजा लेती रही. वही बिहार के लोगो को आकर्षित करने के लिए विभिन्न जगहों पर होटल एशोसिएशन के द्वारा कई कार्यक्रम आयोजित किये गए थे. जहां भोजपुरी सांग पर नेपाल ने बिहार के लोगो को थिरकने पर मजबूर कर दिया. नेपाल की सड़कों पर बीते एक सप्ताह से बिहार की गाड़ियां ही देखने को मिल रही है. धरान के होटल मालिक ने बताया कि बिहार में शराबबन्दी के बाद नेपाल की शराब बिक्री में जबरदस्त उछाल आया है जो हमारे लिए लाभदायक सिद्ध हुआ है. होटल मालिक ने बताया कि नव वर्ष, गर्मी छुट्टियों के अलावा भी बिहार के लोगो का नेपाल आना-जाना बढ़ गया है जो हमारे लिए सुकूनदायक है.

नेपाल सीमा पर भंसार कटाने के लिए खड़ी भारत की गाड़िया

सूर्य अस्त-नेपाल मस्त के नाम से विख्यात नेपाल पहुंचे मधेपुरा के राकेश कुमार ने बताया कि बिहार में शराबबंदी की वजह से अक्सर नेपाल आता हूँ, शराबबंदी बिहार की सबसे बड़ी भूलो में एक थी. राकेश ने बताया कि शराबबंदी सॉल्यूशन नहीं था. वही अररिया से पहुंचे विकास के बताया कि वोट बैंक की चाह में शराबबंदी लाया गया जो सरासर गलत था. पटना से पहुंचे अभिषेक ने बताया कि पड़ोस के राज्य में भी शराब बिकती है, वहां तो शराबबंदी नही थोपी गई. लोग अपनी मर्जी पर पूरे बिहार मे दारू पीते थे तो दिक्कत क्या थी. मोकामा से पहुंचे रमेश यादव बताते हैं कि नीतीश कुमार ने कानून को कड़ा करने के बजाय आबकारी विभाग को दुरुस्त करने के बजाय शराबबंदी लागू कर दिया.जो अजीबोगरीब फैसला रही.

वहां के होटलों में भोजपुरी गीतों पर डांस का इंतजाम कराया गया था

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