वह ‘नरेंद्र’ जिसने ‘नीतीश’ को मैथिली बोलना सिखाया #sundaystory

राजनीति की दुनिया में नरेंद्र और नीतीश का नाता बड़ा दिलचस्प रहा है, कभी बिहार के सीएम नीतीश कुमार गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी के फैन हुआ करते थे. वह बिहार को भी गुजरात जैसा नंबर वन स्टेट बनाना चाहते थे. मगर पीएम पद की रेस में दोनों के बीच ऐसी दरार पड़ेगी कि भोज की थाली छीनने तक की नौबत आ गयी. एक ने हाथ थामा तो दूसरे का मन हाथ झटकने का होने लगा. अब फिर से दोनों मित्रवत हैं. एक दूसरे की तारीफ करते हैं और एक दूसरे के विजय की कामना करते हैं. खैर यह तो राजनीतिक दुनिया की बात है. हम यहां दूसरे नरेंद्र की बात कर रहे हैं, जो मोदी नहीं सिंह है, जो नीतीश कुमार के कॉलेज के जमाने के मित्र हैं, जिन्होंने मगही नीतीश को मैथिली बोलना सिखाया और मिथिला की दुनिया से परिचित कराया. आइये, सुनते हैं वह कहानी पत्रकार कुमार आशीष की कलम से…

कुमार आशीष

कुमार आशीष सहरसा के जाने-माने पत्रकार हैं, प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं

पिछले दिनों दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में मिथिला सम्मेलन में नीतीश जब अचानक धाराप्रवाह मैथिली बोलने लगे तो मिथिलावासी लोग भी हैरत में पड़ गये. फिर उन्होंने खुद जिक्र किया कि किस तरह उन्होंने सहरसा जिले के मैना गांव निवासी नरेंद्र कुमार सिंह से मैथिली सीखी, जो इंजीनियरिंग कॉलेज में उनके सहपाठी थे. उनकी वजह से ही वे इस मधुर भाषा के प्रशंसक बन गये. कॉलेज के दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि नरेंद्र कुमार सिंह उन दिनों हर किसी से मैथिली में ही बात करते थे, इसी वजह से धीरे-धीरे मैथिली उनकी जुबान पर भी चढ़ गयी.

नरेंद्र कुमार सिंह और नीतीश कुमार की दोस्ती पचास साल पुरानी है. कॉलेज के जमाने की दोस्ती से लेकर राजनीति के सफर के उतार-चढ़ाव तक उनकी दोस्ती बनी रही. अक्सर भेट-मुलाकात और फोन पर बातें चलती रहीं. नरेंद्र कुमार सिंह कहते हैं, यहां की लाई-मूढ़ी के भी वे फैन थे. इसलिए मैं हमेशा उनके लिए लाई लेकर जाता था. खास कर मकर संक्रांति के मौके पर घर से जब ये चीजें आती थीं, तो उनके लिए भी आती थी. दही और घी भी आता था. दोनों मित्रों के बीच दोस्ताना आज भी कायम है, नीतीश आज भी सहरसा आते हैं तो नरेंद कुमार सिंह से जरूर मिलते हैं.

नरेंद्र बताते हैं, नीतीश मिथिला और मैथिली के प्रेमी रहे हैं. उन्हें विद्यापति, अयाची मिश्र, मंडन मिश्र और मिथिला पेंटिंग वगैरह से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां भी उनके पास रहती है, वे अपडेट रहते हैं. एक प्रसंग का जिक्र करते हुए वे कहते हैं कि पिछले दिनों बिहार विधानसभा में विश्वासमत हासिल करने के बाद इसी वजह से वे विपक्षियों के पास जाकर बोल बैठे थे, आब कहू मन केहन लगै य…

(प्रभात खबर में प्रकाशित अखबार में बदलाव के साथ.)

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