इस बंदी का मैसेज क्या है लालूजी?

P.M.

आज बिहार बंद है. बड़े दिनों बाद इस तरह बिहार बंद है. सवेरे दफ्तर आ रहा था तो देखा कि पूरा बेली रोड खाली है, सुनसान. लोगों ने खुद-बखुद खुद को घरों में बंद कर लिया है. कुछ सहकर्मी जो दूसरे इलाकों से आये, वे कह रहे थे कि बड़ा घूम फिर कर आये. जगह-जगह बंद कराया जा रहा है. सवेरे पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव की तसवीरें अपनी पार्टी के हुड़दंगियों से साथ एक्जीबिशन रोड के पास दिखी. अभी-अभी दफ्तर के एक फोर्थ ग्रेड स्टॉफ ने पूछा कि बंदी से क्या हो जायेगा, बालू फिर से फिरी हो जायेगा क्या?

बेटी आज घर पर है. उसके स्कूल वालों ने पहले ही मैसेज दे दिया था कि कल अनरेस्ट की आशंका है, इसलिए स्कूल बंद रहेगा. फिर बाद में पता चला कि पूरे राज्य में स्कूलों ने अपने-आप छुट्टी कर ली है, सरकारी स्कूल भी बंद हैं. अस्पतालों में छुट्टी नहीं की जा सकती थी, सो वे खुले हैं. बहरहाल एक मित्र ने फेसबुक पर लिखा है कि एंबुलेंस को भी रोका जा रहा है. चलिये, अच्छा है, लालूजी फिर से पुराने जमाने में लौट रहे हैं. दो दिन बाद उन पर फैसला भी आने वाला है. वे कोई कनिमोई तो हैं नहीं कि छूट जायें, कोड़ा की तरह तीन-चार साल की सजा तो होकर रहेगी.

बहरहाल सवाल यह है कि इस बंदी का मकसद क्या है? क्या आप जनता के दुःखों का सवाल सरकार से पूछ रहे हैं? क्या यह लड़ाई इस बात की है कि बाढ़ पीड़ितों के बीच अब तक मुआवजा क्यों नहीं बंटा? क्या यह लड़ाई शिक्षकों, आंगनबाड़ी सेविकाओं औऱ दूसरे ठेका कर्मियों के समान काम के लिए समान वेतन की है? क्या पलायन कर रहे लोगों के लिए आप मनरेगा की मजदूरी मांग रहे हैं? किस बात की लड़ाई है…

अखबारों से पता चला है कि यह लड़ाई बालू कारोबारियों के हक में आपने शुरू की है. राज्य में अब तक बालू का कारोबार राइफल के जोर पर चलता रहा है, जिसकी राइफल मजबूत होती है वह अपने इलाके के नदियों का पेट कोड़ डालता है. फिर वहां से बालू निकालकर पूरे राज्य में बेचता है. कहा जाता है कि इसमें जुड़े ज्यादातर लोग आपके अपने हैं और इसलिए नीतीश कुमार आपकी इस ताकत पर हमला बोल रहे हैं और अब आप इस गाढ़े वक्त में अपनी इस ताकत को बचाने में जुटे हैं.

भले ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यून बालू के खनन के लिए नियम बनाता हो, उसे राज्य की नदियों के सेहत की फिक्र हो. आपकी फिक्र अपने राइफलधारियों के लिए है. वे ही आपकी बची-खुची ताकत हैं. बुढ़ापे का सहारा और बच्चों का कैरियर इनके ही भरोसे है. इसे आप खोना नहीं चाहते. आपको मालूम है कि आपके बच्चे जनता के बीच जाकर जनता के मुद्दों पर संघर्ष नहीं कर सकते. इसलिए जात की जमात की और लठैत की ताकत बचा कर रखना है. आपकी बंदी इसी वजह से है. यह अन्याय के विरोध में बंदी नहीं. यह आपका शक्ति प्रदर्शन है. मगर क्या आप भूल गये हैं कि इस तरह की चीजों को जमाना बदल रहा है?

क्या आप भूल रहे हैं कि यह सरकार आपको आज इसलिए पूरे राज्य में गुंडागर्दी करने दे रही है, ताकि आपका खौफ राज्य में फैले और उस खौफ को दिखाकर राज्य की शांतिप्रिय आबादी से वोट बटोरा जा सके. इस तरह एक दिन बंद करके आप चार दिन तो टिक सकते हैं, मगर लंबी राजनीति के लिए यह तरीका ठीक नहीं. आप जानते हैं, मगर करेंगे नहीं. क्योंकि आप भी और आपके बच्चे भी अब सुविधाभोगी हो गये हैं, वे जमीन पर लड़ने के काबिल नहीं.

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