कभी लड्डू खाने पहुंचते थे, आजकल पद्मावत की प्रति देखने लोग मनेर पहुंच रहे हैं

बिहार में भले पद्मावत फिल्म लगे न लगे, मगर लोगों का आकर्षण पद्मावत के प्रति कम नहीं हो रहा. फिल्म नहीं तो मलिक मोहम्मद जायसी की किताब पद्मावत ही सही, जिसपर यह फिल्म बनी है. खबर है कि इन दिनों बड़ी संख्या में लोग इस किताब को देखने, पढ़ने और छूने मनेरशरीफ पहुंच रहे हैं.

बिहार कवरेज

व्याकरणशास्त्री पाणिनी और वररुचि, सूफी संत मखदूम याह्या मनेरी और मखदूम दौलत की धरती मनेर जो अपने स्वादिष्ट लड्डुओं की वजह से रही है, इनदिनों एक खास वजह से लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गयी है. दरअसल यहां इनदिनों विवादों में चल रहे काव्य पद्मावत की एक हस्तलिखित प्रति मौजूद है. इस खानकाह के कर्ताधर्ता बताते हैं कि यह प्रति जायसी ने खुद तैयार की है. ऐसे में कई लोग महज इस किताब को देखने, इसे छूने के लिए मनेर पहुंच रहे हैं. पद्मावत फिल्म की बढ़ी पॉपुलारिटी ने अचानक इस जगह पर पर्यटकों की भीड़ बढ़ा दी है.

मनेर खानक़ाह के सज्जादानशीं सैयद शाह तारिक़ इनायतुल्लाह फ़िरदौसी इस बात की पुष्टि करते हैं. वे कहते हैं, ‘इन दिनों खानक़ाह में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ गई है. आने वाला हर आदमी जायसी के पद्मावत के बारे में जानना चाहता है. उसे छूना चाहता है और पढ़ना चाहता है. लेकिन हम उसे लोगों को बार-बार दिखा नहीं सकते, क्योंकि यह किताब काफ़ी ख़राब हालत में है. छूने से इसके पन्ने फटने लगते हैं.’

दरअसल इस कृति के महत्व को देखते हुए सरकार को इसका संरक्षण करना चाहिए. अकेले खानकाह के बूते यह मुमकिन नहीं है. फिरदौसी कहते हैं, इसे कैमिकल ट्रीटमेंट की ज़रूरत है. इसके अलावा इसका डिजिटलाइजेशन भी जरूरी है. यह काम सरकार ही करवा सकती है. हमने पद्मावत को एक कमरे में रख कर बंद कर दिया है.’ यहां पद्मावत के अलावा मुल्ला दाउद की रचना चंदायन की प्रति भी है. चंदायन की सूफी साहित्य की पहली कृति माना जाता है, यहां तक कि कई लोग इसे हिंदी की पहली किताब भी कहते हैं. उसकी स्थिति भी बहुत बेहतर नहीं है.

हालांकि इतिहासकार खानकाह के इस दावे से सहमत नहीं हैं कि यहां मौजूद पद्मावत जायसी द्वारा हस्तलिखित है. इसलिए इसके संरक्षण के लिए कोई खास कोशिश नहीं की गयी है.

पटना के पास स्थित मनेर कई वजहों से प्रसिद्ध है. वैसे तो यह सूफी संतों मखदूम याह्या मनेरी और मखदूम दौलत की मजारों के कारण दुनिया भर में जाना जाता है. साथ ही इसकी पहचान मनेर के लड्डू भी हैं, जिनका लुत्फ आमिर खान जैसे अभिनेता भी उठा चुके हैं. मनेर के लड्डू के लिए जीआई टैग की भी कोशिश की जा रही है.

इसके अलावा यह व्याकरणाचार्य पाणिनी और वररुचि की धरती है. कुल मिलाकर इसकी पहचान ज्ञान की भूमि के रूप में है. जहां इन दिनों पद्मावत को देखने के लिए भीड़ उमड़ रही है.

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