अपनी न्याय व्यवस्था पर सलमान से तलवार तक, राजा से कनिमोई तक सबको भरोसा है

रिम्मी शर्मा

बिहार की रहने वाली पत्रकार रिम्मी शर्मा इन दिनों इंडिया टुडे मीडियाप्लेक्स से जुड़ी हैं और समसामयिक मुद्दों पर लगातार लिखती रहती हैं.

2जी मामले पर सीबीआई कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया. 2014 के लोकसभा चुनावों में इस 1 लाख 76 हजार करोड़ रुपए के घोटाले की खबर ने कांग्रेस सरकार की कब्र खोद दी थी. इसमें मुख्य आरोपी 17 अन्य लोगों के साथ पूर्व टेलीकॉम मंत्री ए राजा और डीएमके की एम कनिमोझी भी थी. लेकिन सबूतों के अभाव में इस मामले से सारे आरोपियों को बरी कर दिया गया.

सही है. आखिर हमारे यहां कानून का उसूल है कि भले ही 100 कसूरवार छूट जाएं पर एक भी बेकसूर को सजा नहीं होनी चाहिए. इसी कारण तो सलमान खान को सजा नहीं हुई. क्योंकि काले हिरन ने आत्महत्या की थी. सलमान ने उसपर गोली नहीं चलाई थी वो हिरन खुद गोली के सामने आ खड़ा हो गया था. न ही सलमान ने फुटपाथ पर सो रहे लोगों पर गाड़ी चढ़ाई थी. गाड़ी का एक्सीलेटर खुद दब गया था और स्टीयरिंग भी अपने आप घूम रही थी. बड़े लोगों की बड़ी गाड़ी होती है भाई. तो सिस्टम भी अनूठा होता ही होगा…

इतना ही नहीं 2008 में मासूम आरूषि की भी हत्या नहीं हुई थी. वो तो खुद ही चाकू कूद गई थी, तभी मर गई. उसके मां बाप मासूम, निरीह लोग अपनी बेटी की इस ‘हरकत’ से बेखबर दूसरे कमरे में सो रहे थे.

हमारी न्यायपालिका सिर्फ न्याय ही करती है बाकी कुछ नहीं. तभी तो संजय दत्त को अनगिनत पेरोल दे दिए जाते हैं, लेकिन एक आम इंसान जमानत तक पाने को तरस जाता है. हमारा जी कानून अंधा नहीं है, न ही उसके सामने कोई गरीब या अमीर टाइप कुछ होता है. बस वो न्याय करता है.

अब इसमें कोर्ट की तो कोई गलती नहीं कि उसके कलम से अधिकतर दोषी माने जाने वाले लोग गरीब, मध्यमवर्गीय ही होते हैं. गिने-चुने ‘महान’ लोगों को भी कभी कभी कैद हो जाती है. लेकिन ये और बात है कि उन महान लोगों को कैद दिलाने के लिए जनता को सड़क पर उतरना पड़ता है. क्योंकि 2006 में दिए गए कोर्ट के फैसले के हिसाब से तो जेसिका लाल का भी कोई कातिल नहीं था. पर जनता ने इंडिया गेट पर कैंडल मार्च निकाला तो देखिए बिल से दोषी भी निकले और सजा भी हुई.

अब कोर्ट भी क्या करे. यार हमारे यहां का पूरा कायदा कानून ही सिर्फ आम जनता के लिए बनाए जाते हैं. अब देखिए न विजय माल्या 9000 करोड़ लेकर विदेश भाग जाता है और पुलिस से लेकर सरकार तक की हैसियत नहीं थी कि उसे रोक पाए. लेकिन वहीं अगर कोई आम आदमी अपने घर या गाड़ी की 5000 या 10,000 के ईएमआई को भी कुछ महीने नहीं भर पाता तो बैंक बाउंसर भेज देते हैं.

मतलब ये कि हमारे देश में न तो सरकार गरीबों की होती है न ही कोर्ट. गरीब होना एक अभिशाप है. पुलिस भी मारती है और पेट भी. आम जनता अपने कमाने का टैक्स देती है, कुछ खाए तो उसका टैक्स देती है, घर का राशन खरीदे तो उसका टैक्स देती है, हवा में सांस ले रही है तो उसका टैक्स देना पड़ता है. यहां तक की शायद अब तो अपनी कमाई के पैसे बैंक में जमा रखने के लिए भी टैक्स देना पड़ेगा. लेकिन वहीं अमीरों की तो पूरी दुनिया ही मुट्ठी में होती है.

देखो कितनी आसानी से साबित हो गया कि कोई घोटाला नहीं हुआ. आरुषि का कोई कातिल नहीं था. सलमान ने हिरन को नहीं मारा.

भारतेंदु की एक कविता है-
हा हा भारत दुर्दशा अब नहीं देखी जाए…
वही हाल हो गया है मेरा… मन कर रहा है कि माल्या की तरह बैंकों से पैसा उधार लूं और विदेश भाग जाउं. वहां से कम से कम देश की दुर्दशा तो नहीं दिखेगी.
जय हिंद जय भारत

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