यह कैसी समीक्षा यात्रा- अपने ही घरों में कैद होकर रह गये बेगमपुर वाले

बक्सर की रोड़ेबाजी ने प्रशासनिक महकमे पर ऐसा खौफ डाला है कि सीएम अब जहां समीक्षा यात्रा के लिए पहुंच रहे हैं वहां पहरा इतना सख्त कर दिया जाता है कि लोग अपने ही घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे. ऐसा ही नमूना कल पूर्णिया के बेगमपुर में देखने को मिला. जब तक सीएम गांव में रहे, गांव के हर दरवाजे पर दो-दो पुलिसकर्मी तैनात दिखे. लोग दरवाजा खोलकर झांकते भी थे तो उनसे पूछताछ शुरू हो जाती थी. ग्राम भ्रमण के दौरान भी गांव वालों को सीएम से दूर ही रखने की कोशिश की गयी. एक-आध व्यक्ति से सीएम ने बात करने की कोशिश भी की तो ग्रामीणों के बदले अधिकारियों ने ही जवाब देकर सीएम को आगे बढ़ा दिया. महीने भर से सीएम की राह तक रहे गांव वालों के लिए यह निराश कर देने वाला अनुभव साबित हुआ. पढ़िये, बासु मित्र की रिपोर्ट.

बासु मित्र

बासुमित्र, संवेदनशील औऱ लोकोपयोगी विषयों पर खोजी नजर रखने वाले पत्रकार हैं और फिलहाल दैनिक भास्कर से जुड़े हैं

एक महीने से बेगमपुर में चल रहा सरकारी ताम-झाम मुख्यमंत्री के दौरा के दौरान समाप्त हो गया. कल से एक बार फिर गांव के लोग अधिकारी को खोजते रहेंगे. समीक्षा यात्रा के शुरुआत में जब लोगों ने मुख्यमंत्री के आने की खबर मिली थी तो उनके मन में साल 2009 की याद ताजा हो चुकी थी, जब मुख्यमंत्री ने रात में रुक कर लोगों से संवाद किया था. मगर प्रशासन की मुस्तैदी इस कदर थी कि हर आदमी अपने ही घर में कैदी बन कर रह गया. जब तक सीएम रहे, तब तक दरवाजा खोलने पर भी पुलिस वाले टोकते रहे. मुख्यमंत्री भी आये तो दो मिनट में एक दो लोगों से बतिया कर चले गये.

पिछले एक महीने से जिला प्रशासन ने इस पंचायत के दो वार्ड 6 और 7 को चमकाने में दिन-रात एक कर दिया था, ताकि जब मुख्यमंत्री गांव पहुंचे तो उन्हें सिर्फ विकास ही दिखे. समीक्षा यात्रा के दौरान सुबह 10 बजे से ही लोगों का आना शुरू ही गया था. पूरे कार्यक्रम के दौरान तीन चौथाई भीड़ जीविका समूह की महिलाओं की थी. समीक्षा यात्रा के दौरान लोगों को जुटाने की जिम्मेदारी जीविका समूह की थी. वेतन मुद्दे के कारण से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के अलावा के एएनएम और दूसरी महिला कार्यकर्ता नदारद थी. बक्सर समेत दूसरे जिलों की घटना की देखते हुए जिला प्रसाशन के द्वारा सुरक्षा का व्यापक इंतजाम था, जिस कारण से कई गाड़ियों को मुख्य कार्यक्रम स्थल से पहले ही रोक दिया गया. अधिकांश महिलाओं को पांच से सात किलोमीटर पैदल चलना पड़ा.

गांव में सीएम और सीएम के चारो तरफ अफसर, नेता और पुलिस वाले

मुख्यमंत्री के आने से पहले अपने दरवाजे पर रंगोली बना कर पूरे परिवार के साथ बैठे बुद्धु राम के चेहरे पर मुस्कान लाते हुए कह रहे थे कि आय पाहुन आबै बला छय. मुख्यमंत्री कुनु सब दिन एतैय की. नौ साल बाद आयब रहल छय तै सब बनैलिये य हुनका देख के बढ़िया लागतै. वहीं सीता देवी बताने लगी कि सब कुछ तो ठीक है. सब सजा हुआ गांव में मेला का माहौल है. अधिकारी लोग बार-बार समझाते हैं कि ऐसे करना है. वैसे करना है. सुबह से उनके आने का इंतजार कर रहे हैं.

समीक्षा यात्रा के दौरान जिला प्रशासन द्वारा हरेक घर के आगे दो-दो मजिस्ट्रेट की नियुक्ति की गई थी. इसके अलावा पुलिस के जवान घर वालों के बाहर निकलते ही दस सवाल पूछते थे. क्या नाम है, कहां जाना है, कौन सा घर है. बाहर में क्या कर रहें हैं? पुलिस के सवालों से लोग घर में ही दुबके रहे.

जैसे ही मुख्यमंत्री गांव के वार्ड छह में पहुंचे, उन्हें अधिकारियों, नेताओं, पुलिस के जवानों ने घेर लिया. मुख्यमंत्री के सवाल का जवाब ग्रामीण के बदले अधिकारी ही देते नजर आए. हालांकि एक दो घरों के पास रुककर मुख्यमंत्री सुमित्रा देवी के घर के आगे बने शौचालय को देखने रुक गए. दरवाजे पर खड़ी सुमित्रा देवी से पूछ लिया सिर्फ शौचालय ही बना है कि इस्तेमाल भी हो रहा है. पानी डाला गया कि नहीं. सुमित्रा देवी के घर से आगे थोड़ी दूरी पर बुधु राम के घर के आगे सजावट देखने के लिए रुक गए. बुधराम से सवाल पूछते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली आती है कि नहीं.

इसके बाद मुख्यमंत्री ने जीविका की दीदियों के द्वारा बनाये गए पॉली हाउस का भी निरीक्षण कर वापस लौट गए. मुख्यमंत्री के वापस लौटते ही वार्ड नम्बर सात के लोगों में मायूसी सी छा गई. इस वार्ड में भी मुख्यमंत्री को हर गली पक्की सड़क और नाली का उदघाटन करना था लेकिन समय नहीं रहने के कारण से काफिला पीछे वापस लौट गया और लोग इंतजार करते रहे.

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