हैप्पी वेलेंटाइन्स डे सुशील मोदी जी, जरा अपने संगठन और अपनी पार्टी की सोच भी बदलिये

पुष्यमित्र

अगर मैं कहूंगा कि वेलेंटाइन्स डे की शुभकामनाओं के असली हकदार सुशील मोदी जैसे व्यक्ति हैं तो आप हैरत में पड़ जायेंगे. मगर सच यही है. उनके जैसा आशिक मिलना मुश्किल है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे कट्टर हिंदूवादी संस्था का सदस्य रहने के बावजूद प्रेम किया तो केरल की एक कैथोलिक युवती से और कहते हैं कि उस युवती से विवाह करने के लिए उन्होंने अपना अजीवन अविवाहित रहने का प्रण भी तोड़ दिया. सच्चे अर्थों में ऐसे व्यक्ति को ही वेलेंटाइन्स डे का ब्रांड अंबेस्डर बनाया जाना चाहिए. हां, यह अलग बात है कि व्यक्तिगत जीवन में उन्होंने जिस बंधन विहीन प्रेम को अपनाया है, अपने राजनीतिक जीवन में वे उसी प्रेम को खारिज करते रहे हैं और संघ और भाजपा की कट्टर हिंदूवादी सोच को बढ़ावा देते रहे हैं. कल तो उन्होंने मेधा पाटेकर जैसे व्यक्तित्व को भी आतंक समर्थक कहने में गुरेज नहीं किया.

काश सुशील कुमार मोदी जैसे राजनेताओं सामाजिक और राजनीतिक जीवन में भी प्रेम को उसी तरह सम्मानित करने का प्रयास किया होता जिस तरह उन्होंने व्यक्तिगत जीवन में किया है तो आज हमारे समाज की दशा कुछ और ही होती. हालांकि यह सच है कि उन्होंने 2014 में लव जेहाद शब्द का विरोध किया था, मगर यह भी कहा था कि वे सांगठनिक रूप से करायी जाने वाली अंतर्धामिक शादियों के विरोध में हैं और इसका विरोध करेंगे. मगर व्यक्तिगत जीवन में उन्होंने न सिर्फ दूसरे मजहब की युवती से विवाह किया बल्कि अपनी पत्नी जेसिस जार्ज को उनके धर्म के हिसाब से जीने की पूरी आजादी दी.

सुशील कुमार मोदी की प्रेम कहानी अद्भुत है. जेपी आंदोलन से जुड़े सुशील मोदी ने आंदोलन के बाद राजनीतिक दल ज्वाइन नहीं किया था. वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़कर जमीनी स्तर पर संघ की सोच को बढ़ाने में जुटे थे. संभवतः उन्होंने प्रचारक बनकर आजीवन अविवाहित रहने का मन बना लिया था, क्योंकि कई जगह ऐसी सूचनाएं मिलती हैं कि वे अपने परिवार से आने वाले वैवाहिक प्रस्तावों को टाल दिया करते थे.

मगर इसी दौरान कश्मीर की एक रेलयात्रा में उनकी मुलाकात केरल की एक कैथोलिक युवती जेसिस जार्ज से हो गयी. जेसिस को जब मालूम हुआ कि उनके सामने बैठा युवक संघ का कार्यकर्ता है तो वे उनसे बहस करने लगी और कट्टर हिंदुत्व की आलोचना करने लगी. मगर इस बातचीत के दौरान सुशील कुमार मोदी ने बड़ी विनम्रता से उनकी बातों का जवाब दिया, जिससे जेसिस के मन में मोदी के व्यक्तित्व की गहरी छाप पड़ी. यात्रा के दौरान दोनों ने एक दूसरे का पता लिया और पत्राचार शुरू हो गयी.

धीरे-धीरे जेसिस ने मन बना लिया कि वे सुशील मोदी से ही विवाह करेंगी. मगर सुशील मोदी विवाह के लिए तैयार नहीं थे. बाद में जेसिस ने उन्हें मनाया और फिर दोनों पक्ष के परिवार वालों को भी मनाया गया. उनकी शादी 1987 में हुई और उस शादी में अटल बिहारी वाजपेयी भी पहुंचे. उन्होंने उस विवाह में ही मोदी से भाजपा ज्वाइन कर लेने कहा. उसके बाद ही उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई.

पिछले साल सुशील मोदी ने अपने बेटे की शादी भी जात-पात के बंधन से मुक्त होकर की और विवाह में सादगी का ख्याल रखा गया. मगर व्यक्तिगत जीवन में प्रेम को इतना महत्व देने वाले सुशील कुमार मोदी ने अपने संगठन और अपनी पार्टी के प्रेम विरोधी रवैये को बदलने के लिए क्या किया यह कहना मुश्किल है.

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