पोलिटिकल रैलियों से लेकर मर्डर तक की सुपाड़ी लेने लगे हैं बाइकर्स गैंग

सड़कों पर लहरिया काटते हुए आड़े-तिरछे बाइक चलाने वाले युवक आपको पहली निगाह में मौत की परवाह न करने वाले सनकी युवक लग सकते हैं. मगर पटना में इन बाइकर्स की तफ्तीश करने वाले बताते हैं कि इनका गैंग बनाना तो महज ब्रांडिंग और पब्लिसिटी है. असली मकसद पोलिटिकल पार्टियों से रैली करने, हंगामा मचाने और जमीन पर कब्जा करने से लेकर मर्डर तक का ठेका लेना है. पिछले दिनों पटना में कई अपराधों में इन बाइकर्स गैंग का हाथ रहा है. पद्मावत का विरोध करने के अभियान में भी लोग इन गैंग्स की भूमिका बताते हैं. हमारे एक साथी ने इस मसले पर यह रिपोर्ट लिखी है. आप भी पढ़ें…

बिहार कवरेज

राजधानी के किसी चौक चौराहे पर आप अपने दोस्तों के साथ खड़े हैं और फर्राटा भरती हुई दर्जन भर से अधिक बाइक आपके बगल से ऐसे गुजर जाएगी जैसे धूम का अगला स्किवेंस यहीं शूट हो रहा हो. इन बाइक सवारों के हाथ में जब आप हॉकी स्टिक और लहराते हुए पिस्टल देखेंगे तो आपकी रूह तक कांप जाएगी. इलाका कितना भी पॉश क्यों न हो, पटना की सड़कों पर यह गुंडागर्दी आप कभी भी देख सकते हैं. पटना पुलिस लाख दावा कर ले बाइकर्स गैंग का दहशत राजधानी में आज भी कायम है. अभी पिछले दिनों ही कुछ बाइकर्स ने सरेशाम बोरिंग रोड में ही एक छात्र नेता को गोली मार दी थी. एएन कालेज का छात्र नेता तो बच गया लेकिन पहचान होने के बाद भी अब तक एक बाइकर्स तक पुलिस नहीं पहुंच सकी है. अपना बर्चस्व कायम करने के लिए बाइकर्स गैग आए दिन शहर में वारदात को अंजाम देते रहते हैं. स्थिति ऐसी है कि तमाम पुलिसिया कार्रवाई के बीच नए-नए गैंग पनप रहे हैं. हाल के दिनों में कई ऐसे गैंग शहर में एक्टिव हैं जिसकी जानकारी पुलिस को भी नहीं है. ऐसे गैंग आए दिन शहर में मारपीट और गुंडई को अंजाम दे रहे हैं.

राजनैतिक दलों के भी आते हैं काम

बाइकर्स गैंग पटना पुलिस के लिए नासूर बन चुका है. इसका खात्मा होना लगभग असंभव है. इसके कई कारण भी हैं. कई बार यह बात सामने आई है कि राजनैतिक दल और धार्मिक संगठन भी इन बाइकर्स का इस्तेमाल अपनी रैलियों और प्रदर्शन में करते हैं. बाइकर्स गैंग राजनेताओं तक अपनी पहुंच का प्रचार सोशल मीडिया के जरिए भी करते हैं. गैंग सोशल मीडिया का इस्तेमाल भी अपना खौफ कायम करने के लिए करता है. एक बार खौफ कायम हो जाने के बाद गैंग रैलियों में भीड़ जुटाने का ठेका लेने, जमीन पर कब्जा करने से लेकर हत्या करने तक का ठेका लेते हैं. इसके एवज में गैंग के सरगना को मोटी रकम मिलती है. हाल के दिनों में राजधानी में हुई हत्याओं में से कई कांडों में बड़े अपराधियों ने मोटी रकम देकर इसे बाइकर्स से अंजाम दिलवाया है.

ररूखदार लोगों के बच्चे भी बाइकर्स 

बाइकर्स गैंग में पुलिस पदाधिकारियों के साथ साथ कई विभाग के बड़े अधिकारियों के बच्चे तक शामिल हैं. ये बाइकर्स स्कूल और कालेज के बच्चे हैं. कई इंजीनियरिंग के छात्र भी बाइकर्स हैं और जेल की हवा खा चुके हैं. पढाई लिखाई की उम्र में ऐसे बच्चों को शहर की सड़कों पर आवारगर्दी करने का शौक होता है. स्कूल के इन छात्रों को फेसबुक और सोशल साइट्स के जरिए गैंग में शामिल किया जाता है. गैंग की चुंगल में एक बार आने के बाद इनके लिए बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है. कई अधिकारियों ने इसी कारण अपने बच्चों को राज्य से ही बाहर भेज दिया. कई बाइकर्स गैंग नाम बदलकर सोशल साइट पर अभी भी एक्टिव हैं. मीडिया में बाइकर्स गैंग के खिलाफ आ रही खबरों को ये शेयर भी कर रहे हैं. माइंस रिटर्न, माइंस साइको, स्टार ऑफ पटना, हाइवे माफिया, बाप ऑफ पटना नाम से कई फिलहाल एक्टिव हैं. इसके अलावा बोर्नबीटा गैंग, माइंस गैंग, रोजर्स गैंग, ब्लेड गैंग, किंग्स ऑफ पटना, बादशाह, द किलर, हंटर, तलवार जैसे गैंग पटना पुलिस के सरदर्द हैं ही. गैंग का कई सरगना पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं तो कई जमानत पर बाहर आकर फिर से एक्टिव हो गए हैं.

पुलिस पर हमला करने से भी नहीं चूकते 

पिछले साल जक्कनपुर थाने की पुलिस ने माइंस गैंग के सरगना बिट्टू यादव को करबिगहिया स्थित उसके आवास से देर रात को गिरफ्तार किया था. सूत्रों की माने तो जब पुलिस उसके घर पहुंची तो उसने दरवाजा खोलते ही जक्कनपुर थानेदार पर ही ऑटोमेटिक चाकू तान दी. जनवरी महीने में आशियाना दीघा रोड पर तकरीबन बीस से पच्चीस बाइकर्स ने मिलकर शास्त्रीनगर थाने की दो पुलिस पदाधिकारियों के साथ धक्का मुक्की और गाली गलौज किया था. इसमें पुलिस ने रंजीत कुमार के साथ एक अधिकारी के बेटे उज्ज्वल प्रकाश को गिरफ्तार किया था.

 

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