एवरेस्ट के लिये पूर्णिया से उड़ा था पहला विमान और इस पर बनी फिल्म को मिला था ऑस्कर

बासु मित्र

आज हमारा जिला अपनी 248 वां स्थापना दिवस मना रहा है. बहुत की कम लोगों को इस बात की जानकारी है कि माउंट एवरेस्ट के लिये 1933 में पहला विमान ने पूर्णिया से उड़ान भरी थी. यह हिमालय  क्षेत्र का पहला विस्तृत और वैज्ञानिक सर्वेक्षण था. और इस पर बनी फिल्म को 1936 में  ऑस्कर अवार्ड से सम्मानित किया गया था. जब भी ऑस्कर की बात आती है तो हम रिचर्ड एडिनबरो  की गांधी, स्लम डॉग मिलेनियर, रसल कुट्टी जैसे नाम को याद कर खुश हो जाते हैं. यह बहुत कम लोगों को मालूम है कि माउंट एवरेस्ट के लिए पहली रोमांचक हवाई यात्रा की रिकार्डिंग पर बनी 30 मिनट की इस फ़िल्म ‘विंग्स ओवर एवरेस्ट’  को ऑस्कर से नवाजा जा चुका है.

1953 में तेनजिंग नोरगे और एडमंड हिलेरी के माउंट एवरेस्ट पर फतह से 20 साल पहले  साल 1933 में हमारा पूर्णिया एक नए इतिहास का गवाह बनने जा रहा था. दरअसल ब्रिटेन में माउंट एवरेस्ट के ऊपर से उड़ान भरने की योजना तैयार हो रही थी, जिसके लिए बाकायदा लंदन में माउंट एवरेस्ट फ्लाइंग कमिटी का गठन हुआ था. योजना के बनने के बाद कर्नल एथटर्न को इस मिशन का चीफ आब्जर्बर नियुक्त किया गया और ब्रिटिश सेना की तरफ से स्टीवर्ट ब्लैकर को पायलट, डेविड मैक्लिंटर और फोटोग्राफी के लिए एस आर बोनट  को चुना गया. प्लान बनने के बाद सबसे बड़ी समस्या फंड की आ रही थी.

लेडी हडसन ने किया था पूरे प्रोजेक्ट को फंड

ब्रिटेन की रहने वाली लेडी हडसन जो एयरक्राफ्ट और एडवेंचर की दीवानी थी, ने पूरे प्रोजेक्ट को फंड करने का फैसला लिया. इसके बाद माउंट एवरेस्ट मिशन की तैयारी शुरू हुई थी. मिशन के लिए दो विशेष विमान वेस्ट लैंड पीवी-6 और पीवी-3 जनवरी के अंतिम सप्ताह में  बन कर तैयार हुआ और लंदन से 11 फरवरी को इन दोनों विमान को पानी के जहाज के रास्ते कराची लाया गया. कराची में जहाज को एसेंबल किया गया.

20 मार्च को कराची से पूर्णिया के भरी गई थी उड़ान

कराची से यह विमान 20 मार्च को जोधपुर, दिल्ली के रास्ते पूर्णिया पहुंचा. जहां माउंट एवरेस्ट  तक उड़ान भरने के लिए बेस कैंप बनाया गया था. टीम इसे किसी भी सूरत पर इस अभियान को अप्रैल महीने से पहले खत्म कर लेना चाहती थी ताकि हिमालयन क्षेत्र में मानसून आने के बाद अभियान पूरा नहीं हो सकता था. लेकिन जिस समय विमान पूर्णिया पहुंचा उस समय मौसम ठीक नहीं था और टीम को पूर्णिया कैंप में मौसम के ठीक होने का इंतजार करना पड़ा.

एयर बेस कैंप में उस विमान को देखने उमड़ी पूर्णिया वासियों की भीड़

तीन अप्रैल की सुबह 8.25 मिनट पर पूर्णिया से भरी गई उड़ान

तीन अप्रैल 1933 इतिहास के पन्नो में दर्ज होने वाला दिन था. इस दिन सुबह 8 बजकर 25 मिनट मुख्य पायलट लार्ड  क्लाइडडेडेल ने कर्नल स्टीवर्ट ब्लैकर के साथ वेस्टलैंड पीवी-3 और लेफ्टिनेंट डेविड मैकइनटायर ने कैमरामैन  एसआर बोनट के साथ वैस्टलैंड पीवी-6 में उड़ान भरी. इस दौरान इरेमजेंसी लैंडिंग के लिए फारबिसगंज में इंतजाम किया गया था.

हिमालय की पहाड़ियों पर उड़ता वह एयरक्राफ्ट

30 मिनट के उड़ान के बाद 19 हजार फीट की ऊंचाई से दिखी धुंधली तस्वीर

दोनों विमान 30 मिनट की उड़ान भरने के बाद पूर्णिया से 40 माइल की दूरी तय करने के बाद जब फारबिसगंज से आगे पहुंची जहां इमरजेंसी लैंडिंग ग्राउंड था. उस समय 19 हजार फीट की ऊंचाई से उन्हें माउंट एवरेस्ट की धुंधली तस्वीर दिखी. इसके बाद  10 बजकर 05 मिनट पर पहली बार कोई विमान दुनिया की सबसे ऊंची चोटी के ऊपर चक्कर लगा रहा था. माउंट एवरेस्ट का 15 मिनट चक्कर लगाने के बाद विमान वापस पूर्णिया बेस कैंप लौटा.

खेत में काम करते किसानों ने उस विमान को उड़ते हुए कुछ इस तरह देखा

और जब फट गई ऑक्सीजन  सिलेंडर की पाइप 

दरअसल जिस जहाज पर कैमरामैन एसआर बोनट थे. उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया था. ऊंचाई पर सांस लेने के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन मिल सके इस लिए इसमें ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था की गई थी और इसे पाइप के सहारे जोड़ा गया था. माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने के दौरान यह पाइप बीच में टूट गई थी जिसे एसआर बोनट ने अपनी रूमाल से बांध कर काम चलाने लायक बनाया और शूटिंग जारी रखा.

1934 में बनी फिल्म विंग्स ओवर माउंट एवरेस्ट

माउंट एवरेस्ट की पहली हवाई यात्रा पर ज्याफ्रे बार्काफ और इवोर मोटाँगों ने सन 1934 में इस टीम के यात्री कैमरामैन एसआर बोनट के द्वारा फिल्माए गए दृश्य और तस्वीर के माध्यम से मिशन में शामिल लोगों के साथ लगभग आधे घन्टे की एक फ़िल्म विंग्स ओवर माउंट एवरेस्ट का निर्माण किया जो जून 1934 को प्रदर्शित हुई. इस फ़िल्म को 1936 में ऑस्कर सम्मान से नवाजा गया था.

एवरेस्ट फतह में फ़िल्म की महत्वपूर्ण भूमिका

विंग्स ऑफ माउंट एवरेस्ट फ़िल्म की एवरेस्ट समिट में महत्वपूर्ण भूमिका रही है. 1933 के बाद जब पहली बार 1953 में तेनजिंग नोरगे और एडमंड हिलेरी ने माउंट एवरेस्ट पर पहुंचे थे तो उन्होंने इस फ़िल्म और तस्वीर के माध्यम से रास्ते का अध्ययन किया था.

Spread the love

Related posts