क्या आपके गांव तक बिजली पहुंच गयी?

P.M.

27 दिसंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घोषणा कर दी कि बिहार के सभी 39073 रेवेन्यू गांवों तक सरकार ने बिजली पहुंचा दी है. हालांकि अभी भी सभी गांव पूर्ण रूप से विद्युतीकृत नहीं हुए हैं. इनमें से 10,998 गांवों के कई टोलों में बिजली नहीं पहुंची है. कुल मिलाकर 21,890 टोलों में बिजली नहीं पहुंची है, इनमें दिसंबर, 2018 बिजली पहुंची ली जायेगी. मगर क्या यह सच है कि बिहार के सभी गांवों तक बिजली पहुंच गयी?

केंद्र सरकार के गर्व पोर्टल पर बिहार में विद्युतीकरण के आंकड़े

यह बात पहली नजर में विश्वसनीय नहीं लगती है. सोशल मीडिया में जब इससे संबंधित सवाल पूछे गये तो कई लोगों ने कहा कि फलां-फलां गांवों में बिजली नहीं पहुंची है. खास तौर पर अररिया-किशनगंज-कटिहार-सहरसा जिलों के कई गांवों में बिजली नहीं पहुंचने की बात कही जा रही है. लोगों ने गांवों के नाम भी बताये हैं. तो फिर सरकार आखिर यह दावा कैसे कर रही है कि बिहार के सभी गांवों में बिजली पहुंचा दी गयी.

महज दो साल पहले मैं कटिहार के अमदाबाद प्रखंड में गया था. उस वक्त मुझे यह हैरतअंगेज जानकारी मिली थी कि उस पूरे प्रखंड में कहीं बिजली नहीं है. आज भी एक स्थानीय जानकार व्यक्ति ने सूचना दी है कि उस प्रखंड के कई पंचायतों में बिजली नहीं पहुंची है. दिलचस्प है कि राज्य सरकार ने कटिहार जिले के 79 गांवों को बेचिरागी बता दिया है, उसका कहना है कि उन गांवों में कोई नहीं रहता. इसलिए वहां बिजली नहीं पहुंचायी गयी है. जबकि स्थानीय लोग समझ नहीं पा रहे कि उनके जिले में बेचिरागी या निर्जन गांव कौन से हैं, और कहां हैं. क्या ऐसा तो नहीं कि जिन गांवों में सरकार बिजली नहीं पहुंचा पायी उसे निर्जन घोषित कर दिया.

कटिहार के अमदाबाद प्रखंड मुख्यालय में दो साल पहले तक बिजली नहीं थी तब ऐसे ही हर काम सोलर से होता था. यहां तक कि सरकारी बैंक भी सोलर और जेनरेटर से चलते थे.

केंद्र सरकार के गर्व पोर्टल के मुताबिक बिहार सरकार ने ऐसे 105 गांवों की जानकारी दी है, जो निर्जन हैं, उन्हें छोड़ कर सभी गांवों में बिजली पहुंचा दी गयी है. बिहार सरकार को अपने 2747 गांवों तक बिजली पहुंचानी थी, जिनमें 105 को छोड़ दिया जाये तो 2642 गांवों में बिजली पहुंच गयी है. मगर क्या इनमें कोसी, कमला, बागमती, गंडक, महानंदा के तटबंधों के बीच फंसे गांव भी हैं.

खबर है कि कोसी तटबंध के बीच फंसे गांवों में और पटना के दियरा इलाके में भी बिजली पहुंचाने की पहल भी शुरू हुई थी. मगर यह सूचना भी है कि यहां सभी गांवों तक अभी बिजली नहीं पहुंची है. कागज में बता दिया गया है कि बिजली पहुंच गयी. कई जगह ऐसी तरकीबों का भी इस्तेमाल किया गया कि गांव की सीमा में बिजली का एक खंबा लगाकर उसे तार से जोड़ दिया गया और एक खंबे के सहारे गांव को विद्युतीकृत घोषित कर दिया गया. ये किस्से तो बाद में सामने आयेंगे.

अभी इस दावे में सबसे बड़ा झोल यह है कि खुद सरकारी आंकड़े भी यही बता रहे हैं कि राज्य के सिर्फ पांच फीसदी गांव ऐसे हैं, जहां शत-प्रतिशत घरों में बिजली है. हो सकता है कि ऐसा इस वजह से भी हो कि गांव में कई लोग बिजली कनेक्शन लेने की स्थिति में नहीं हों. मगर एक आंकड़ा यह भी है कि राज्य के 59 फीसदी गांव ऐसे हैं, जहां हर घर तक बिजली पहुंचाने की स्थिति है. बांकी गांवों में हर घर को बिजली दी भी नहीं जा सकती. अभी तकरीबन 11 हजार टोलों तक बिजली पहुंचाने का काम बचा है. क्या ऐसे में राज्य सरकार के हालात ऐसे हैं कि वह अपनी पीठ खुद थपथपा सके.

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