कड़ाके की ठंड में जुटे थे दसियों हजार लोग, दागे जा रहे थे किक पर किक

बिहार कवरेज

कड़कड़ाती ठंड भी लोगों के उत्साह और रामरूप मेहता महोत्सव के प्रति लगाव को कम नहीं कर सकी. मंगलवार को हसपुरा फील्ड में रामरूप मेहता महोत्सव में मौसम और काम को नजरअंदाज कर दसियों हजार लोग वहां पहुंचे और समाजवादी नेता शहीद रामरूप मेहता को श्रद्धांजलि दी. कार्यक्रम के दौरान हसपुरा और इसके आसपास के तमाम रास्ते जाम की हालत में रहे. हसपुरा बाजार करीब चार घंटे तक पूरी तरह से जाम रहा. दोपहर 12 बजे से ही हसपुरा के तमाम रास्तों पर लोग आयोजन स्थल पर जाते दिखने लगे थे. समारोह करीब दो बजे से शुरू हुआ, तब तक फील्ड में इंच-इंच में लोग भर चुके थे. मैदान से लेकर बाउंड्री, पेड़, गाड़ी, छत पर तक लोग भरे हुए थे. समारोह में हसपुरा के अतिरिक्त देवकुंड, कलेर, महेंदिया, अरवल, परासी, गोह, उपहारा, करपी, दाउदनगर, ओबरा आदि थाना क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे.

जो खेलेगा खेल,कभी न जाएगा जेलजो करेगा खेल,वो हरदम जाएगा जेलअभी कमेंटेटर जी बोलीन हैं कमेंट्री में।शेरो शायरी के साथ कमेंट्री जारी।खेल हाफ चांस के बाद रोमांचक दौर में है। औरंगाबाद-गया,दोनों टीम 0-0 पर है।

Posted by Nirala Bidesia on Tuesday, January 2, 2018

कला, खेल, साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए चार लोगों को रामरूप मेहता सम्मान दिया गया. रामरूप मेहता कला सम्मान हाजीपुर के वरिष्ठ रंगकर्मी क्षितिज प्रकाश को, रामरूप मेहता साहित्य पुरस्कार हिंदी व मगही के नामचीन साहित्यकार प्रो अलखदेव प्रसाद अचल को और रामरूप मेहता पत्रकारिता सम्मान नवादा के पत्रकार अशोक प्रियदर्शी को दिया गया. रामरूप मेहता खेल सम्मान को लिए राष्ट्रीय कबड्डी टीम की खिलाड़ी शमा परवीन का नाम तय किया गया था. परंतु वे हैदराबाद में होने के कारण समारोह में नहीं आ सकीं. चारों सम्मान के लिए नामों को एक स्वतंत्र कमेटी तय करती है. कमेटी में इस बार पत्रकार निराला व पुष्यमित्र, कार्टूनिस्ट पवन और रंगकर्मी अनीश अंकुर शामिल थे.

उच्च विद्यालय हसपुरा के क्रीड़ा स्थल में मंगलवार को 38वें रामरूप मेहता महोत्सव के अवसर पर आयोजित फुटबाल मैच में औरंगाबाद को गया ने 3-2 से हराकर खिताब पर कब्जा कर लिया. काफी रोमांचक मुकाबले में पूरा मैदान करीब 50 हजार दर्शकों के शोर से गूंजता रहा. जब भी गोल का मौका आता, दर्शकों खिलाड़ियों का शोर मचाकर उत्साह बढ़ाते.

मैच में निर्धारित समय में कोई गोल नहीं हो सका. इस दौरान दोनों टीम के गोलकीपर ने कई खूबसूरत बचाव किए. अंत में पेनाल्टी शूट आउट के जरिये मैच का निर्णय हुआ. मैच में रेफरी की भूमिका धनबाद के आरएस भगत ने निभाई, जबकि कमेंटेटर डॉ. हरिद्वार प्रसाद थे. गोलजज जगदानंदलाल कर्ण और प्रो. कृष्णदेव पासवान थे. समारोह के अंत में सुधांशु सुमन ने विजेता टीम को शील्ड देकर सम्मानित किया.

समारोह में सबसे पहले राजनीति साजिश के तहत 16 मार्च 1980 को शहीद हुए रामरूप मेहता की तस्वीर पर पुष्पार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई. श्रद्धांजलि समारोह में मुख्य अतिथि और तिरंगा सम्मान यात्रा के सूत्रधार सुधांशु सुमन ने कहा कि तेजी से खत्म होते जा रहे नैतिक मूल्यों के कारण आज रामरूप मेहता की प्रासंगिकता अधिक है. रामरूप मेहता के जीवन आदर्शों पर चलकर ही समाज और देश को बचाया जा सकता है. उन्होंने अपने आदर्शों के लिए जीवन की बलि दे दी, लेकिन कभी समझौता नहीं किया. समारोह के दौरान तिरंगा सम्मान यात्रा का भी आयोजन किया गया. खिलाड़ियों और दर्शकों ने तिरंगा लहराते हुए देशभक्ति की शपथ ली. वहीं शिक्षाविद डॉ. एम रहमान व भारत स्काउट गाइड के राज्य सचिव श्रीनिवास कुमार ने कहा कि रामरूप बाबू सही मायनों में एक योद्धा थे. उनकी शहादत समाज के लिए हमेशा प्रकाश स्तंभ का काम करती रहेगी. कार्यक्रम का आयोजन रामरूप मेहता यूनिवर्सल फाउंडेशन ने किया.

विदित हो कि यह समारोह पिछले 38 वर्षों से लगातार शहीद रामरूप मेहता की याद में उनके जन्मदिन पर आयोजित किया जाता है. समाजवादी नेता मेहता इसी प्रखंड के बिरहारा गांव के रहने वाले थे, जिनकी हत्या 16 मार्च 1980 को कर दी गई थी. स्थानीय जनता ने उसी दिन पांच हत्यारों को मार डाला था. रामरूप मेहता का संबंध मधु लिमये, कर्पूरी ठाकुर, रामानंद तिवारी आदि बड़े समाजवादी नेताओं से था.

समारोह को हरेश कुमार, आरिफ रिजवी, बीडीओ वेद प्रकाश, उप प्रमुख अनिल आर्य, सर्वेश सिंह, सर्वोदय कुमार, रघुनीराम शास्त्री, अखलाक खान आदि ने संबोधित किया. समारोह की अध्यक्षता हरेश कुमार और संचालन अरविंद कुमार वर्मा ने किया.

 

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