CBI डॉयरेक्टर जोगिंदर सिंह ने EX CM डॉ. जगन्नाथ मिश्र से माफी मांगी थी!

बिहार कवरेज

भाजपा नेता औऱ डॉ. जगन्नाथ मिश्र के पुत्र नीतीश मिश्र

यह दावा डॉ. जगन्नाथ मिश्र के पुत्र और भाजपा नेता नीतीश मिश्र ने कल अपने ऑफिशियल फेसबुक पेज पर किया है. उनका कहना है कि सीबीआई के पूर्व निदेशक जोगिंदर सिंह ने अपनी किताब इनसाइड सीबीआई में उनके पिता डॉ. जगन्नाथ मिश्र पर कुछ भ्रामक तथ्य लिख डाले थे और इस वजह से उनके पिता ने 1999 में जोगिंदर सिंह पर मानहानि का मुकदमा कर दिया था. 2009 में जोगिंदर सिंह ने डॉ. मिश्र से इस मामले में माफी भी मांगी थी. इस केस का नंबर था सीएस (ओएस) 501/1999 और अधिवक्ता थे माननीय जयंत नाथ.

दरअसल नीतीश मिश्र ने यह खुलासा इस वजह से किया है, क्योंकि लाइव सिटीज पोर्टल ने पिछले दिनों जोगिंदर सिंह की पुस्तक इनसाइड सीबीआई का हवाला देते हुए एक खबर प्रकाशित की थी कि अगर जोगिंदर सिंह होते तो माथा पीट लेते! नीतीश मिश्र ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा है,

“26 दिसंबर को एक वेबसाइट में चारा घोटाले की जांच करने वाली एजेंसी सीबीआई के दिवंगत पूर्व निदेशक जोगिंदर सिंह की किताब इनसाइड सीबीआई के अंशों का हवाला देते हुए ये शीर्षक दिया गया है कि अगर जोगिंदर सिंह होते तो माथा पीट लेते! वेबसाइट के आर्टिकल में उल्लिखित किताब के अंशों के जरिये ये बताने की कोशिश की गई है कि डॉ. जगन्नाथ मिश्र ने चारा घोटाले के आरोपियों का संरक्षण किया और उन्हें पैसे भी दिए गए. मेरे एक फेसबुक मित्र ने इस आर्टिकल का लिंक मुझसे शेयर किया था, जिसे देखकर मैं हैरान हूं कि क्या कोई पत्रकार बिना किसी विषय को समझे-जाने और संबद्ध पक्ष से बात किए इस तरह लेखन-प्रकाशन कर सकता है? जहां तक मैं समझता हूं पत्रकारिता और पत्रकार एक गंभीर, संवेदनशील, जिम्मेदार और जवाबदेह दायित्व का नाम है, जिसकी बुनियाद निष्पक्षता है. संभवत: इस आर्टिकल को लिखने वाले के पास जानकारी और तथ्यों का अभाव रहा होगा, इसलिए उन्हें इसी किताब और इस पूरे विषय के बारे में सच्चाई से अवगत कराना जरूरी है. ”

नीतीश मिश्र का आरोप है कि चारा घोटाला की जांच में भारी चूक हुई थी, इससे संबंधित प्रत्युष सौरभ राजा का आलेख हम पहले प्रकाशित कर चुके हैं. (वह आलेख यहां पढ़ सकते हैं.) नीतीश इस बारे में लिखते हैं,

“मैं अपनी पिछली पोस्ट में भी बता चुका हूं कि तत्कालीन सीबीआई निदेशक दिवंगत जोगिंदर सिंह के नेतृत्व में चारा घोटाले की जांच में किस तरह की भारी चूक हुई थी, जब उन्होंने डॉ. जगन्नाथ मिश्र को 1988 में बिहार का मुख्यमंत्री बताते हुए गलत आरोप में घसीटकर आरोपी बना डाला था (उस वक्त डॉ. मिश्र सीएम नहीं थे-बिहार कवरेज). चारा घोटाले का केस माननीय न्यायालय के विचाराधीन होने के दौरान देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित जांच एजेंसी के निदेशक जैसे अहम पद पर आसीन अधिकारी इसी विषय पर अपनी किताब कैसे लिख सकता था, ये अपने आप में विचित्र है.

लालू यादव के साथ जगन्नाथ मिश्र

इस प्रसंग में मानहानि के मुकदमे के बारे में नीतीश मिश्र लिखते हैं,

“डॉ. मिश्र ने इसी किताब यानी इनसाइड सीबीआई के इन्हीं अंशों को लेकर दिवंगत जोगिंदर सिंह के खिलाफ माननीय दिल्ली हाईकोर्ट में 1999 में मानहानि का मुकदमा किया था और 2009 में दिवंगत सिंह ने उनसे माफी मांगी थी. इस केस का नंबर था सीएस (ओएस) 501/1999 और अधिवक्ता थे माननीय जयंत नाथ. क्या इससे पहले किसी आरोपी ने अपने ही खिलाफ जांच करने वाली एजेंसी के निदेशक पर मानहानि का मुकदमा किया होगा? डॉ. मिश्र ने ऐसा किया क्योंकि सीबीआई के तत्कालीन निदेशक की किताब में उल्लिखित तथ्य भ्रामक, दुर्भावनापूर्ण और पूर्वाग्रहप्रेरित थे. चूंकि डॉ. मिश्र सही थे,  इसीलिए आखिरकार दिवंगत जोगिंदर सिंह को माफी मांगनी पड़ी और ये भी अपनी तरह का एकमात्र उदाहरण ही होगा कि सीबीआई के निदेशक को उसी मामले के एक आरोपी से माफी मांगनी पड़ी, जिसके खिलाफ वो खुद जांच कर रहा हो.

दिवंगत जोगिंदर सिंह के माफीनामे के बाद डॉ. मिश्र ने केस वापस लेने पर सहमति जता दी थी. 12 मई 2009 को माननीय अदालत में सहमति पत्र दाखिल किया गया था, जिसपर 25.05.2009 को कोर्ट ने मुहर लगाई थी. जिस किताब के अंश का हवाला देकर वेबसाइट में आर्टिकल लिखा गया है, उन अंशों को दिवंगत जोगिंदर सिंह ने कोर्ट की कार्यवाही का विवरण मात्र बताया था और लिखित में ये कहा था कि उनकी नीयत डॉ. मिश्र को किसी तरह से मानहानि पहुंचाने की नहीं थी.”

Spread the love

Related posts