FM की प्रेम कहानियों में इतना प्रेम होता है कि मन भारी होने लगता है

आशुतोष कुमार पांडेय आजकल FM रेडियो का अजब हाल है. इन पर RJ की जगह फ़िल्म अभिनेता, गायक, संगीतकार और फिल्मकार बतकही करते हैं. वैसे तो पहले भी रेडियो वाले फ़िल्मी दुनिया और सितारों के किस्से ही सुनाते-बताते थे, अब ये खुद आकर अपने किस्से सुनाने लगे हैं. क्या फ़िल्मी दुनिया में बेरोज़गारी बढ़ गयी है. क्योंकि ये लोग टीवी पर रियालिटी शोज में भी उसी तरह नजर आते हैं. सवेरे दस बजे बिग FM पर अनु कपूर सुहाना सफ़र लेकर आते हैं. रविवार को अनु मलिक भी एक कार्यक्रम…

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“ठंड? ठंड कहां है…” ठंड की खबर लेने निकले लेखक को मिले अजब-गजब जवाब

इन दिनों बिहार में भीषण ठंड पड़ रही है. स्कूलों में छुट्टी है. शहरों में अलाव जलाये जा रहे हैं, कंबल बंट रहे हैं. सड़कें सूनी हैं और लोग रजाई छोड़ने को तैयार नहीं हैं. इन परस्थितियों में कोसी कछार के ग्रामीण इलाके में बसने वाले कवि कथाकार मिथिलेश कुमार राय ने सोचा कि जरा गांव घर में घूमकर इस कड़ाके की सर्दी का जायजा लिया जाये. वे निकले और उन्होंने कई लोगों से बातें की. इस बातचीत में उन्हें किसिम-किसिम के जवाब मिले. आप भी पढ़ें… मिथिलेश कुमार राय…

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Good News-नये साल पर फेसबुक ने मिलाया दस साल पहले बिछड़े मां-बेटे को

आपने फेसबुक-वाट्सएप पर किसी गुमशुदा की शेयर होती तस्वीरें खूब देखी होंगी, मगर इन शेयर होती तस्वीरों के जरिये एक मां और बेटे के मिलन का किस्सा अपने पड़ोस में घटित होता मैं पहली बार देख रहा हूँ. यह किस्सा भागलपुर का है, जहां नये साल के पहले दिन तेलंगाना की एक वृद्ध महिला का मिलन उसके बेटे से हुआ. इस मिलन का दिलचस्प बयान एक सज्जन ने फेसबुक पर किया है, जो इस प्रसंग का गवाह था. साकेत विनायक नववर्ष पर 10 सालों से बिछड़े एक परिवार का मिलन!…

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रात में पार्टी, दिन में हनुमान जी, हम तो ऐसे मनाते हैं हैप्पी न्यू इय़र

नवहिंदुवादियों का एक धड़ा पिछले कुछ सालों से चैत्र प्रतिपदा को नव वर्ष के रूप में स्थापित कराने में जुटा है, मगर जो ठेठ हिंदू समाज है वह न जाने क्यों अंगरेजों के नव वर्ष पर मंदिरों में उमड़ने लगता है. आज मंदिरों में जैसी भीड़ है वैसी किसी पर्व त्योहार पर ही दिखती है. यह इस बात की निशानी है कि भले यह अंगरेजों का नया साल हो, यह हमारे खून में पूरी तरह से घुल गया है. पढ़ें इस मसले पर आशुतोष पांडेय जी आरा वाले का आलेख…

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खिजरसराय के गांवों में मुम्बइया पूजा ने न जाने कितने फूल खिला रखे हैं

निराला जी पिछले दिनों खिजरसराय के कुछ गांवों की यात्रा पर थे. वहां उनकी मुलाकात एक मुम्बइया लड़की पूजा से हुई जो मध्य बिहार के इस ठेठ देहात में स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में सकारात्मक बदलाव लाने में जुटी थी. उनके मन में सहज सवाल था कि एक महानगर की यह लड़की बिहार के गांवों में कैसे रह रही है और कैसे उसने यह सब मुमकिन किया. इन्हीं बातों का जवाब इस रिपोर्ताज में है. निराला बिदेसिया पूजा से पहले कभी आमने-सामने की कोई बात-मुलाकात नहीं थी. सिर्फ एक दफा…

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मैं किशनगंज हूं, सोने की चिड़िया के सुर्खाब परों के जैसा

फिरोज किशनगंज के रहने वाले हैं, जेएनयू से स्पेनिश की पढ़ाई की है और अभी चेन्नई शहर में एक निजी शहर में कार्यरत हैं. उनके दिल में किशनगंज बसता है. वे हमेशा अपने शहर, अपने इलाके को याद करते हैं. पढ़िये, उन्होंने इस पोस्ट में किशनगंज को किस शिद्दत से याद किया है. फिरोज आलम मैं किशनगंज हूँ. सीमांचल की गोद मे बैठा एक अनाथ, एक अछूत हूँ, एक कमज़ोर व बीमार पहचान हूं, इसलिए साल के पहले दिन भी खामोश हूँ. अब तो बस बिस्तर पर पड़े किसी रोगी…

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रसगुल्ला और सिंघाड़ा- लेखक सच्चिदानंद सिंह की स्वाद यात्रा

नये साल की शुरुआत हम स्वाद यात्रा से कर रहे हैं. वैसे तो समोसा और रसगुल्ला दोनों में से किसी का संबंध बिहार से नहीं है. मगर बिहारियों को दोनों बहुत पसंद आता है. वह समोसा को सिंघाड़ा बनाकर खाता है और रसगुल्ला को दशमलव प्रणाली से, यानी एक बार में कम से कम दस. इस सिंघाड़ा और रसगुल्ला की स्वाद यात्रा कथाकार सच्चिदानंद सिंह ने लिखी है. वे अपने बचपन में भागलपुर के उस बहंगी वाले से इस यात्रा की शुरुआत करते हैं, जो घूम-घूमकर समोसा-रसगुल्ला बेचता था. फिर…

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निराला को पीर मोहम्मद मूनिस पुरस्कार

हम सबके प्रिय निराला जी को कल एक संस्था ने पीर मोहम्मद मूनिस पुरस्कार से सम्मानित किया है. निराला जी की पत्रकारिता से आप सभी लोग परिचित हैं. प्रभात खबर में घुमंतू पत्रकारिता और तहलका के लिए बिहार और झारखंड की पत्रकारिता करते हुए ये बिहार-झारखंड की सांस्कृतिक विरासत के इनसाइक्लोपीडिया बन गये हैं. जाहिर सी बात है कि वे हर तरह के पुरस्कार के स्वाभाविक हकदार हैं. इस पुरस्कार समारोह के दौरान जो आयोजन हुआ उसकी प्रेस रिलीज संस्था के संचालक ने भेजी है. उसे हम यहां ज्यों का…

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जुमलों में नहीं, पक्का काम करने में विश्वास करते हैं नीतीशे कुमार

रोशन कुमार मैथिल बिहार के मुख्यमंत्री जुमला करने में नहीं बल्कि काम करने में विश्वास करते हैं. शायद यहीं कारण है कि आज बिहार में बहार है नीतीशे कुमार है. अगर ऐसे ही वो काम करते रहें और लक्ष्य प्राप्त करते रहें तो आशा करते हैं कि आगे भी सत्ता पर काबिज रहेंगे. जानकारों की मानें तो नीतीश कुमार भले कुछआ की चाल चलते हैं, लेकिन मंजिल तक समय पर पहुंचकर विजयी प्राप्त करना जानते हैं. वर्ष 2005 में जब नीतीश कुमार राजग गठबंधन में सीएम बनें तो बिहार की…

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पटना के बाबर इमाम से पूछिये ग़ालिब कौन हैं

पुष्यमित्र पूछते हैं वो कि ‘ग़ालिब’ कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या। ग़ालिब का यह शेर काफी मशहूर है. मगर मियां ग़ालिब को उसके ही मुल्क में कितने लोग जानते समझते हैं. उर्दू के चार हजार और फ़ारसी के दस हजार शेरों में से बमुश्किल छंटाक भर शेर ऐसे हैं, जिन्हें समझते-बूझते और दुहराते रहते हैं. ग़ालिब के दीवान में कुछ शब्दों के मायने फुटनोट्स में लिखे रहते हैं, उनकी मदद से हम थोड़ा आगे बढ़ते हैं. मगर कितना, उनके 90 फीसदी शेर आज भी हमारे लिये अजनबी…

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